मेक इन इंडिया अभियान के 12 साल पूरे हो चुके हैं, और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री (Commerce and Industry Minister) पीयूष गोयल ने इस मौके पर देश की आर्थिक प्रगति के कुछ ऐसे हैरान कर देने वाले आंकड़े साझा किए हैं.
चाहे बात देश में आने वाले विदेशी निवेश (FDI) की हो या फिर युवाओं को मिलने वाले रोजगार की, भारत ने हर मोर्चे पर नए रिकॉर्ड कायम किए हैं. आइए, जानते हैं कि मेक इन इंडिया ने देश की तस्वीर कैसे बदली है.
FDI का महा-रिकॉर्ड: 843 अरब डॉलर का निवेश
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विदेशी कंपनियों का निवेश (Foreign Direct Investment – FDI) बहुत मायने रखता है. वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर 2025-26 तक भारत में कुल 843 अरब डॉलर (843 Billion Dollars) का विदेशी निवेश आया है. अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने अब तक का सबसे ज्यादा 94.53 अरब डॉलर का सालाना FDI हासिल करके इतिहास रच दिया है.
इसका सीधा सा मतलब यह है कि दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां अब भारत को बिजनेस और मैन्युफैक्चरिंग के लिए सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद जगह मान रही हैं.
PLI स्कीम बनी संजीवनी बूटी: 14.6 लाख युवाओं को नौकरियां
मेक इन इंडिया को रफ्तार देने में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने रीढ़ की हड्डी का काम किया है. इस योजना का मुख्य मकसद देश के भीतर ही सामान बनाने वाली कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन देना है.
31 मार्च तक के आंकड़े देखें तो PLI स्कीम का जादू साफ नजर आता है. देश में 2.40 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश हुआ. कुल 23.8 लाख करोड़ रुपये के सामान का उत्पादन हुआ और 15.2 लाख करोड़ रुपये का सामान विदेश बेचा (निर्यात) गया. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष (Direct & Indirect) रूप से 14.6 लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिला.
किन सेक्टरों की खुली किस्मत?
PLI स्कीम का सबसे बड़ा फायदा इलेक्ट्रॉनिक्स (जैसे भारत में बने iPhones), टेलीकॉम, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल उपकरण, ऑटोमोबाइल, आईटी हार्डवेयर और स्पेशलिटी स्टील जैसे क्षेत्रों को मिला है.
ऑस्ट्रेलिया के साथ नई डील की तैयारी
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने ये भी बताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने के लिए कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट (CEPA) और द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty) पर तेजी से काम चल रहा है.
दोनों देश शिक्षा (Education) और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ेंगे, जिससे आने वाले समय में भारतीय बिजनेस को और बढ़ावा मिलेगा.
मेक इन इंडिया सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने का एक ठोस ढांचा बन चुका है. जब देश में सामान बनता है, तो नौकरियां यहीं पैदा होती हैं और भारत का पैसा देश में ही रहता है.