नई कार खरीदने का सपना पूरा करने के लिए लोग अक्सर महीनों तक पैसे जोड़ते हैं और फिर अपनी पसंद की गाड़ी घर ले आते हैं. लेकिन असली खर्च कार खरीदने के बाद शुरू होता है. हर महीने EMI, पेट्रोल-डीजल, इंश्योरेंस और सर्विसिंग पर पैसा खर्च करना पड़ता है. इसके अलावा पार्किंग और छोटी-मोटी मरम्मत जैसे खर्च भी जेब पर असर डालते हैं. अगर कार खरीदते समय इन बातों का ध्यान न रखा जाए, तो बाद में बजट बिगड़ सकता है. इसलिए नई कार खरीदने से पहले कुछ गलतियों से बचना जरूरी है.
इन 5 बातों का रखें ध्यान
1. अपनी कमाई से ज्यादा महंगी कार खरीदना
कई लोग कार खरीदते समय अपने बजट से ज्यादा कीमत वाली गाड़ी चुन लेते हैं. शुरुआत में EMI भरना आसान लगता है, लेकिन घर के खर्च और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच यही किस्त परेशानी बन सकती है. इसलिए कार खरीदने से पहले अपनी महीने की कमाई, घरेलू खर्च और पहले से चल रही EMI का हिसाब जरूर लगाएं. ऐसी कार चुनें, जिसकी किस्त भरने के बाद भी आपके पास बचत और दूसरे जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त पैसे रहें. यह भी ध्यान रखें कि कार खरीदने के बाद उसका मेंटेनेंस भी आपकी जेब पर भारी न पड़े.
2. कार इंश्योरेंस को हल्के में लेना
कार खरीदते समय लोग अक्सर गाड़ी की कीमत और फीचर्स पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जबकि इंश्योरेंस का खर्च भी जरूरी है. पॉलिसी खरीदने के बाद हर साल उसे रिन्यू कराना पड़ता है और इसके लिए पैसे खर्च करने होते हैं. इसलिए कार खरीदने से पहले इंश्योरेंस के खर्च का भी अंदाजा लगा लें. पॉलिसी रिन्यू कराते समय अलग-अलग विकल्पों की तुलना करें और देखें कि किसमें कितना कवरेज मिल रहा है. सिर्फ कम प्रीमियम के चक्कर में जरूरी सुरक्षा से समझौता करना सही नहीं है.
3. पेट्रोल-डीजल के खर्च का सही हिसाब न लगाना
कार खरीदते समय ज्यादातर लोग माइलेज जरूर देखते हैं, लेकिन सिर्फ कंपनी के बताए आंकड़ों के आधार पर ईंधन का बजट बनाना सही नहीं है. शहर के ट्रैफिक, बार-बार ब्रेक लगाने, AC चलाने और रोजाना तय की जाने वाली दूरी का असर भी माइलेज पर पड़ता है. अगर आप रोज कार से ऑफिस जाते हैं या अक्सर लंबी दूरी तय करते हैं, तो पेट्रोल-डीजल पर अच्छा-खासा खर्च हो सकता है. इसलिए कार खरीदने से पहले यह हिसाब लगाएं कि महीने में कितनी दूरी तय करेंगे और उसके लिए कितना ईंधन लगेगा.
4. समय पर सर्विसिंग नहीं कराना
कार के रखरखाव में लापरवाही करना आगे चलकर महंगा पड़ सकता है. कुछ लोग पैसे बचाने के लिए सर्विसिंग टालते रहते हैं, लेकिन इससे छोटी-मोटी खराबी भी बड़ी समस्या बन सकती है. इसका असर कार की परफॉर्मेंस और माइलेज पर भी पड़ सकता है. इसलिए कंपनी की ओर से बताए गए सर्विस शेड्यूल का पालन करें. कार खरीदते समय यह भी पता कर लें कि उसकी नियमित सर्विसिंग पर कितना खर्च आएगा. हर महीने या कुछ समय के अंतराल पर मेंटेनेंस के लिए पैसे अलग रखना बेहतर रहेगा.
5. पार्किंग और छोटे खर्चों को भूल जाना
कार खरीदने के बाद खर्च सिर्फ EMI, ईंधन और सर्विसिंग तक सीमित नहीं रहता. पार्किंग फीस, कार की सफाई, एक्सेसरीज और अचानक होने वाली मरम्मत पर भी पैसा खर्च होता है. इनमें से हर खर्च छोटा लग सकता है, लेकिन महीने के आखिर तक इनका कुल जोड़ बजट बिगाड़ सकता है. इसलिए कार खरीदने से पहले इन खर्चों को भी अपने हिसाब में शामिल करें. गैरजरूरी एक्सेसरीज खरीदने से बचें और अचानक आने वाले खर्चों के लिए कुछ पैसे अलग रखें. इससे कार रखने का खर्च संभालना आसान होगा.