Car Mileage New Rules: गाड़ी खरीदते समय सबसे पहला सवाल यही होता है माइलेज कितना देगी? लेकिन हकीकत यह है कि शोरूम में बताए गए आंकड़े और सड़क पर मिलने वाला माइलेज अक्सर मेल नहीं खाते. खासकर जब एसी चालू हो. इसी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सरकार अब माइलेज टेस्टिंग के नियम बदलने जा रही है, ताकि ग्राहकों को ज्यादा सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिल सके.
माइलेज टेस्ट में क्या बदलेगा
यूनियन रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने प्रस्ताव रखा है कि 1 अक्टूबर 2026 से भारत में बिकने वाली सभी पैसेंजर कारों का माइलेज टेस्ट एसी ऑन करके किया जाएगा. अभी तक ज्यादातर कंपनियां बिना एसी के माइलेज टेस्ट करती थीं, जिससे वास्तविक ड्राइविंग और कंपनी के दावों के बीच बड़ा अंतर रह जाता था.
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AIS 213 स्टैंडर्ड के तहत होगा नया टेस्ट
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ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, M1 कैटेगरी यानी पैसेंजर गाड़ियों का माइलेज टेस्ट अब AIS 213 स्टैंडर्ड के अनुसार किया जाएगा. इस टेस्ट में कार का एसी चालू रहेगा और उसी स्थिति में फ्यूल एफिशिएंसी मापी जाएगी. चूंकि आज के दौर में बिना एसी गाड़ी चलाना लगभग नामुमकिन है, ऐसे में यह नियम ग्राहकों के लिए ज्यादा वास्तविक माइलेज तस्वीर सामने लाएगा.
कंपनियों पर बढ़ेगी जवाबदेही
एसी ऑन माइलेज टेस्ट लागू होने से ऑटो कंपनियों पर भी दबाव बढ़ेगा. अब उन्हें ऐसे आंकड़े नहीं दिखाने पड़ेंगे जो सिर्फ लैब तक सीमित हों. इससे ग्राहकों को खरीद के समय बेहतर तुलना और सही फैसला लेने में मदद मिलेगी. फिलहाल सरकार ने इस ड्राफ्ट पर 30 दिन तक आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं.
माइलेज के साथ साथ सेफ्टी को लेकर भी सरकार सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है. Bharat NCAP 2 के तहत नए सेफ्टी नियम 1 अक्टूबर 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है. इसमें गाड़ियों की सेफ्टी रेटिंग अब सिर्फ क्रैश टेस्ट तक सीमित नहीं रहेगी.
अब पांच पैमानों पर होगी सेफ्टी रेटिंग
नई व्यवस्था में कारों को क्रैश प्रोटेक्शन, पैदल यात्रियों की सुरक्षा, सेफ ड्राइविंग फीचर्स, क्रैश अवॉयडेंस और हादसे के बाद की सुरक्षा जैसे पांच पैमानों पर आंका जाएगा. पहली बार यूरोपियन स्टैंडर्ड की तरह पैदल यात्रियों और दोपहिया सवारों की सुरक्षा को भी खास महत्व दिया गया है.
VRU सेफ्टी को मिलेगा खास वेटेज
वल्नरेबल रोड यूजर्स यानी पैदल चलने वालों और दोपहिया सवारों की सुरक्षा को कुल रेटिंग में 20 प्रतिशत वेटेज देने का प्रस्ताव है. यह बदलाव भारतीय सड़कों की हकीकत को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, जहां सबसे ज्यादा जोखिम इन्हीं यूजर्स को होता है.
अब तक क्यों मिलता था कम माइलेज
अब तक कंपनियां यूरोपीय मानकों के अनुसार बिना एसी के माइलेज टेस्ट करती थीं और वही आंकड़े वेबसाइट व ब्रॉशर में दिखाए जाते थे. जबकि भारत जैसे गर्म देश में एसी के बिना गाड़ी चलाना मुश्किल है. एसी चालू होते ही माइलेज पर असर पड़ता है और यहीं से कंपनी के दावे और असली अनुभव के बीच फर्क साफ नजर आने लगता है.
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