Trump tariff impact: भारतीय ऑटो पार्ट्स कंपनियां इन दिनों अमेरिका की नई टैरिफ पॉलिसी से परेशान हैं। अमेरिकी सरकार ने भारतीय ऑटो कंपोनेंट्स पर लगने वाले आयात शुल्क को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया है। इस बढ़ोतरी के कारण भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में अपने प्रोडक्ट बेचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसका सीधा असर लगभग 3.08 अरब डॉलर यानी 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के एक्सपोर्ट पर पड़ने वाला है।
क्या है पूरा मामला?
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के इस फैसले से भारत से होने वाला करीब 3.08 अरब डॉलर का ऑटो पार्ट्स एक्सपोर्ट प्रभावित होगा। इस वजह से कई भारतीय कंपनियां अब अपने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को अमेरिका या फिर मेक्सिको जैसे देशों में शिफ्ट करने पर विचार कर रही हैं, जहां टैक्स का बोझ अपेक्षाकृत कम है। कुछ कंपनियां पहले से ही विदेशों में अपनी यूनिट्स चला रही हैं और वहीं से अमेरिकी बाजार को सप्लाई करने की रणनीति बना रही हैं।
क्यों बढ़ी कंपनियों की मुश्किलें?
अब तक भारतीय ऑटो पार्ट्स कंपनियां अमेरिका को हर साल लगभग 6.6 अरब डॉलर (करीब 55,000 करोड़ रुपये) का एक्सपोर्ट करती थीं। लेकिन नए 50% ड्यूटी नियम लागू होने के बाद वहां कारोबार करना लगभग असंभव जैसा हो गया है
संसेरा इंजीनियरिंग का उदाहरण
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलुरु की ऑटो कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनी संसेरा इंजीनियरिंग (Sansera Engineering) इंजन और चेसिस पार्ट्स के लिए जानी जाती है। अमेरिकी टैरिफ बढ़ने के बाद कंपनी ने अमेरिका में ही अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू करने की योजना को तेज कर दिया है। कंपनी का मानना है कि वहां लोकल स्तर पर उत्पादन करने से अमेरिकी बाजार में उनकी पकड़ मजबूत होगी और टैरिफ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
ये भी पढ़ें- ट्रंप के टैरिफ के बाद क्या कारें हो जाएगी महंगी? ऑटो पार्ट्स पर सबसे बड़ा असर
कंपनी के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर एफ. आर. सिंहवी ने बताया कि, हम पहले से ही अमेरिका में प्लांट लगाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन अब बढ़े हुए टैक्स को देखते हुए इस योजना को तेजी से लागू करेंगे। उनका कहना है कि उनकी हाई-टेक इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स का विकल्प तुरंत तैयार करना आसान नहीं है और अगर अमेरिका में फिर से मैन्युफैक्चरिंग खड़ा करनी पड़ी तो इसमें लगभग 3-5 साल का टाइम लग सकता है।
कुल मिलाकर क्या होगा असर?
साल 2024 में भारतीय कंपनियों ने अमेरिका को अरबों डॉलर के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए थे। लेकिन अब नए टैरिफ की वजह से अमेरिकी मार्केट में कारोबार करना कंपनियों के लिए लगभग नामुमकिन हो गया है। माना जा रहा है कि इस कदम से भारतीय ऑटो पार्ट्स उद्योग को भारी नुकसान होगा। यही कारण है कि कंपनियां अब इस समस्या का हल ढूंढने के लिए नए बाजारों की तलाश कर रही हैं या फिर अमेरिकी बाजार के लिए वहीं पर प्लांट लगाने की रणनीति बना रही हैं।
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