Cab Driver Strike: आज गुरुग्राम में नहीं मिलेगी कैब, हड़ताल पर ड्राइवर्स, जानें क्या हैं इनकी मांग

आज गुरुग्राम में कैब मिलना मुश्किल होने वाला है क्योंकि यहां कैब ड्राइवर्स हड़ताल पर है. ड्राइवरों की हड़ताल के पीछे की वजह आपको चौंका सकती है. सुरक्षा को लेकर उठी बड़ी मांग ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है जानिए आखिर पूरा मामला क्या है.

Cab On strike

गुरूग्राम में कैब ड्राइवर्स की हड़ताल.

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Gurugram Cab Driver Strike: अगर आप आज गुरुग्राम में कैब के भरोसे कहीं जाने की सोच रहे हैं, तो थोड़ा संभल जाइए. आज यानी 23 मार्च को एप-आधारित कैब ड्राइवरों की हड़ताल ने शहर की रफ्तार को धीमा कर दिया है. सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं और फर्जी यात्रियों के खतरे के चलते ड्राइवरों ने यह कदम उठाया है, जिसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की यात्रा पर पड़ रहा है.

क्यों कर रहे हैं ड्राइवर हड़ताल?

गुरुग्राम के सेक्टर 46, सेक्टर 38 और अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में ड्राइवर इकट्ठा हुए और अपनी समस्याएं सामने रखीं. उनका कहना है कि लगातार बढ़ रहे हमलों और असुरक्षा के माहौल में काम करना मुश्किल हो गया है, इसलिए मजबूर होकर उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा.

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यात्रियों के KYC की मांग क्यों?

ड्राइवरों की सबसे बड़ी मांग यह है कि जैसे उनका पूरा वेरिफिकेशन किया जाता है, वैसे ही यात्रियों का भी अनिवार्य KYC होना चाहिए. उनका कहना है कि कई बार फर्जी आईडी से कैब बुक होती है, जिससे अपराध का खतरा बढ़ जाता है. अगर यात्रियों की पहचान सुनिश्चित हो जाए, तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकती है.

सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

कैब कंपनियों की तरफ से दिए गए SOS बटन और अन्य सुरक्षा फीचर्स पर भी ड्राइवरों ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इमरजेंसी के वक्त ये फीचर्स उतने कारगर साबित नहीं होते, जितना दावा किया जाता है. कई बार मदद समय पर नहीं मिलती, जिससे ड्राइवर खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं.

हालिया घटनाओं ने बढ़ाया डर

ड्राइवरों के बीच डर का माहौल हाल की कुछ घटनाओं के बाद और गहरा गया है. जनवरी में 25 साल के ड्राइवर सूरज सिंह की हत्या ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया. अपनी ही गाड़ी में इस तरह की घटना ने ड्राइवरों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे कितने सुरक्षित हैं.

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शिकायत सिस्टम की कमी भी बड़ा मुद्दा

ड्राइवरों का यह भी कहना है कि कई बार यात्रियों के साथ विवाद या दुर्व्यवहार की स्थिति बनती है, लेकिन उनकी शिकायत सुनने के लिए कोई मजबूत सिस्टम नहीं है. वे चाहते हैं कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म हो, जहां वे अपनी समस्या आसानी से दर्ज करा सकें और उस पर सही कार्रवाई भी हो.

आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है?

इस हड़ताल का असर सीधे तौर पर आम यात्रियों पर पड़ रहा है. जहां पहले कुछ ही मिनटों में कैब मिल जाती थी, अब लोगों को 15 मिनट या उससे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है. खासकर ऑफिस जाने वाले और मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति काफी परेशान करने वाली बन गई है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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