हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Asian Games 2026election commissionBigg Boss 20

अब कारों को आसानी से नहीं मिलेगी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग, फिजिकल बटन जरूरी, Euro NCAP ने बदले सेफ्टी के नियम

Euro NCAP ने 2026 से कार सेफ्टी के लिए नए नियम लागू किए हैं. अब 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग पाने के लिए कार में हॉर्न, वाइपर और SOS जैसे जरूरी फंक्शन्स के लिए फिजिकल बटन होना अनिवार्य होगा. जानें इन बदलावों का कंपनियों और ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा.

विज्ञापन
5-स्टार सेफ्टी रेटिंग पाना होगा मुश्किल.

कार खरीदते समय अब लोग सिर्फ डिजाइन और माइलेज नहीं, बल्कि सेफ्टी रेटिंग पर भी खास ध्यान देने लगे हैं. अच्छी सेफ्टी रेटिंग वाली कारें ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं और एक्सीडेंट की स्थिति में पैसेंजर की सुरक्षा की संभावना बढ़ जाती है. अब 2026 से Euro NCAP (यूरो एनसीएपी) के नए नियम लागू होने वाले हैं, जिनकी वजह से कंपनियों के लिए 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग हासिल करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाएगा. खास बात यह है कि अब गाड़ियों में फिजिकल बटन होना जरूरी होगा.

5-स्टार सेफ्टी रेटिंग पाना होगा मुश्किल

Euro NCAP दुनिया भर में सेफ्टी रेटिंग तय करने वाला सबसे भरोसेमंद संगठन माना जाता है. खासकर यूरोप में लगभग 90% खरीदार कार खरीदने से पहले सेफ्टी रेटिंग पर नजर डालते हैं. यही वजह है कि सभी कंपनियां अपनी कार को 5-स्टार रेटिंग दिलाने की कोशिश करती हैं. लेकिन अब Euro NCAP ने 2026 के लिए जो नए नियम बनाए हैं, उनके कारण इस रेटिंग को हासिल करना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया है.

सेफ्टी पर फोकस

अब तक कंपनियां गाड़ियों में बड़े-बड़े टचस्क्रीन देकर उन्हें मॉडर्न दिखाने पर ज्यादा ध्यान दे रही थीं. लेकिन Euro NCAP के नए नियम सुविधा से ज्यादा सुरक्षा को प्राथमिकता देंगे. इसका मतलब है कि गाड़ियों में मौजूद ADAS यानी एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम को असल दुनिया के हालातों में और बेहतर प्रदर्शन करना होगा.

विज्ञापन

फिजिकल बटन होना जरूरी

Euro NCAP ने साफ कर दिया है कि 5-स्टार रेटिंग पाने के लिए गाड़ियों में कुछ जरूरी फंक्शन के लिए फिजिकल बटन, डायल या स्विच होने ही चाहिए. अब केवल टचस्क्रीन पर निर्भर रहकर अधिकतम रेटिंग नहीं मिलेगी. कई कंपनियों ने अपने नए मॉडल्स में लगभग सभी फंक्शन को टचस्क्रीन पर शिफ्ट कर दिया था, लेकिन अब उन्हें वापस बटन लगाने होंगे.

किन फंक्शन्स के लिए जरूरी होंगे बटन?

नए नियमों के अनुसार हॉर्न, टर्न सिग्नल, हैजार्ड लाइट्स, वाइपर, इमरजेंसी SOS और अन्य जरूरी फीचर्स के लिए अलग-अलग बटन कार में साफ दिखाई देने चाहिए. इसका मकसद है कि ड्राइवर का ध्यान सड़क से न हटे और वह आसानी से जरूरी फंक्शन इस्तेमाल कर सके.

विज्ञापन

टचस्क्रीन क्यों बढ़ाती है खतरा

रिसर्च के अनुसार, सड़क से सिर्फ 2 सेकंड के लिए भी नजर हटाना एक्सीडेंट का कारण बन सकता है. लेकिन टचस्क्रीन पर किसी फंक्शन को ढूंढते समय ड्राइवर का ध्यान 5 से 40 सेकंड तक भटक सकता है. यूरोप में 2020 से अब तक ध्यान भटकने से होने वाली दुर्घटनाओं में 20% तक वृद्धि दर्ज की गई है. इसी वजह से Euro NCAP ने फिजिकल बटन की अनिवार्यता तय की है.

कार कंपनियों के लिए बढ़ी परेशानी

पिछले कुछ वर्षों में कंपनियां ‘क्लटर-फ्री’ यानी बिना ज्यादा बटन वाला इंटीरियर डिजाइन अपना चुकी हैं. अब फिजिकल बटन को वापस लाना उनके लिए बड़ा झटका है. इसके लिए गाड़ियों के इंटीरियर को दोबारा डिजाइन करना होगा, सप्लाई चेन में बदलाव करने होंगे और इससे लागत भी बढ़ेगी. कई कंपनियों को अपने मॉडल लॉन्च में देरी करनी पड़ सकती है.

विज्ञापन

ड्राइविंग एक्सपीरियंस में आएगा बड़ा बदलाव

इन नए नियमों के बाद कार में ड्राइविंग अनुभव और भी सुरक्षित हो जाएगा. हालांकि इससे कंपनियों की लागत जरूर बढ़ेगी, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा और सड़क हादसों में कमी लाने में यह कदम अहम भूमिका निभाएगा. आने वाले समय में जब भी कोई नई कार खरीदी जाएगी, तो सिर्फ डिजाइन और फीचर्स ही नहीं, बल्कि उसके फिजिकल कंट्रोल भी अहम फैक्टर बनेंगे.

ये भी पढ़ें- साल के आखिर में कार खरीदना फायदेमंद या घाटे का सौदा? जानिए सही समय में गाड़ी खरीदने का असली गणित

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola