मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग कब थमेगी, इस सवाल पर अब एक नई उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है. इंडोनेशिया ने मध्यस्थता की पेशकश की है, जिस पर तेहरान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. ईरान के जकार्ता स्थित दूतावास ने रविवार को एक बयान जारी कर इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की मध्यस्थता के लिए तैयार रहने की सराहना की.

दूतावास ने कहा कि वे इस संघर्ष में मध्यस्थता के लिए इंडोनेशियाई राष्ट्रपति की तत्परता का स्वागत करते हैं, बशर्ते दोनों पक्ष सहमत हों. साथ ही, उन्होंने इंडोनेशियाई अधिकारियों से अमेरिका और इजरायल की 'आक्रामकता और अपराधों' की कड़ी निंदा करने की अपील भी की, ताकि स्थिति पर मजबूत रुख अपनाया जा सके.

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प्रबोवो सुबियांतो तेहरान जाने को तैयार


यह प्रस्ताव इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय की ओर से शनिवार को आया था, जिसमें कहा गया कि प्रबोवो सुबियांतो तेहरान जाने को तैयार हैं, अगर दोनों पक्ष बातचीत के लिए राजी हो जाएं. इंडोनेशिया ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद व कूटनीति को प्राथमिकता देने की अपील की है, ताकि सुरक्षा की स्थिति सामान्य हो सके. ईरान के दूतावास ने इस पहल को सराहते हुए कहा कि यह कदम संघर्ष को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है, हालांकि उन्होंने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों पर सख्त रुख अपनाने पर जोर दिया.

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हमलों से प्रभावित ईरान


यह विकास ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसमें सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत भी शामिल है. क्षेत्रीय तनाव चरम पर है, होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है.

दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश


इंडोनेशिया, जो दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है और गैर-संरेखित आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है, ने खुद को तटस्थ मध्यस्थ के रूप में पेश किया है. हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल व्यावहारिक रूप से कितनी सफल होगी, यह अमेरिका के रुख पर निर्भर करेगा, क्योंकि वाशिंगटन ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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ईरान की सकारात्मक प्रतिक्रिया


फिलहाल, ईरान की सकारात्मक प्रतिक्रिया से लगता है कि तेहरान बातचीत के रास्ते पर आने को तैयार है, जो जंग को थामने की दिशा में पहला कदम साबित हो सकता है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात पर नजरें गड़ाए हुए है कि क्या यह मध्यस्थता प्रस्ताव वास्तविक वार्ता की शुरुआत बनेगा या सिर्फ कागजी घोषणा रह जाएगा. क्षेत्र की स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस हो रही है और इंडोनेशिया का यह कदम उस दिशा में एक उम्मीद जगाता है.