TrendingDonald trump tariffsAI summitiranDonald Trump

---विज्ञापन---

कौन हैं रिक वोल्डनबर्ग? जिसने टैरिफ के खिलाफ जीती लड़ाई, कैसे एक टॉयमेकर बना ट्रंप के गले की फांस

Donald Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके टैरिफ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बच्चों के खिलौने बनाने वाले ने केस जीता है। इस शख्स ने ही टैरिफ के खिलाफ केस दर्ज किया था और 10 महीने चली सुनवाई के बाद केस जीत लिया।

खिलौने बनाने वाले ने सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जीती।

Donald Trump Tariffs: अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ के खिलाफ चल रहे केस में फैसला आया और राष्ट्रपति ट्रंप को बड़ा झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप टैरिफ को अवैध करार देकर रद्द कर दिया है। पूरे मामले में एक पक्ष तो राष्ट्रपति ट्रंप हैं, जो केस हार गए हैं, यह पूरी दुनिया जानती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि केस जीता किसने है? सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ के खिलाफ किसने मुकदमा दायर किया था और 10 महीने चली लड़ाई जीती?

रिक खिलौने बनाने वाली कंपनी के CEO हैं

बता दें कि ट्रंप टैरिफ मामले में सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिका में रिक वोल्डनबर्ग की हो रही है, जिन्होंने टैरिफ की घोषणा होते ही वकीलों से बात करके राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ केस दर्ज कर दिया था। रिक की बच्चों के लिए खिलौने बनाने की कंपनी है। उनकी कंपनी का नाम लर्निंग रिसोर्स है, जो शिकागो शहर के पास है और इसमें बच्चों के लिए एजुकेशन टॉय बनाए जाते हैं। रिक इस कंपनी के CEO हैं और उन्होंने ही सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी।

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: टैरिफ रद्द होने के बाद क्या भारत को देना पड़ेगा 18% टैक्स? India से ट्रेड डील पर आया डोनाल्ड ट्रंप का बयान

---विज्ञापन---

टैरिफ छोटे व्यापारियों को नुकसान का तर्क

रिक ने केस दायर करते हुए याचिका में तर्क दिया कि टैरिफ से छोटे और मिड-साइज बिजनेस को ही सबसे ज्यादा नुकसान होगा। बड़ी कंपनियां लॉबिंग करके और संसाधनों के दम पर खुद को टैरिफ से बचा लेती हैं, लेकिन छोटे उद्योग ऐसा नहीं कर पाते, इसलिए नुकसान उठाते हैं। अमेरिका में आज भी कई इंडस्ट्री और कंपनियां ऐसी हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है और कई परिवार उन कंपनियों-इंडस्ट्रियों के जरिए ही गुजर बसर कर रहे हैं।

टैरिफ लगने से कंपनी की लागत बढ़ गई थी

रिक वोल्डनबर्ग की कंपनी भी फैमिली बिजनेस है, जिसे उनकी मां ने खोला था। उनकी कंपनी में बने खिलौने पूरे एशिया में सप्लाई होते हैं। ट्रंप ने जब IEEPA 1977 कानून के तहत टैरिफ लगाया तो लागत बढ़ गई और कंपनी की विस्तार की योजनाएं ठप पड़ गईं। नया वेयरहाउस प्रोजेक्ट रद्द करना पड़ा। नई भर्ती रोकनी पड़ी। मार्केटिंग के बजट में भी कटौती करनी पड़ी। उन्हें पता था कि टैरिफ लगने से कंपनी छोटी होगी और कम कमाई करेगी।

मशहूर प्रोडक्ट की कंपनी शरणार्थी बन गई

रिक ने बताया कि टैरिफ का सबसे ज्यादा असर उनके मशहूर टॉय प्रोडक्ट BubblePlush Yoga Ball Buddies पर पड़ा। उन्हें एक शिपमेंट कंपनी को 50000 डॉलर का अतिरिक्त जुर्माना देना पड़ा। उनकी कंपनी को इसका प्रोडक्शन कंपनी पहले चीन से भारत में शिफ्ट करनी पड़ी और फिर यह कंपनी शरणार्थियों जैसी बन गई। इस कंपनी को बचाने के लिए ही उन्होंने टैरिफ के खिलाफ कोर्ट केस करके कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया।

यह भी पढ़ें: ‘शर्मनाक फैसला, कलंक हैं जज’, सुप्रीम कोर्ट पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, जानें टैरिफ रद्द करने पर क्या बोले?

छोटे बिजनेसमैन और NGO ने साथ दिया

रिक के अनुसार, बड़े अमेरिकी कॉरपोरेट्स इस कानूनी लड़ाई में साथ नहीं आए। क्योंकि उनके पास बैकअप, सप्लाई चेन और लॉबिंग का रास्ता है, लेकिन छोटे बिजनेसमैन और कुछ गैर-लाभकारी संगठनों ने उनका साथ दिया। उन्होंने रिसर्च करके पता लगाया कि 1977 का IEEPA कानून देश के राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। इसलिए निचली अदालतों ने भी ट्रंप के टैरिफ को अवैध बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध ही करार दिया।

बता दें कि रिक वोल्डनबर्ग ने करोड़ों डॉलर फीस देकर केस लड़ा है, लेकिन उन्होंने इसे इन्वेस्टमेंट बताया, जिससे भविष्य में मुनाफ हो सकता है। लिस्ट में उनके जैसे कई छोटे कारोबारी हैं, जो टैरिफ के कारण नुकसान झेले रहे हैं।


Topics:

---विज्ञापन---