ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच विवाद अब लगातार बढ़ता जा रहा है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को दी गई धमकियों के बाद 8 यूरोपीय देशों ने अपनी को ग्रीनलैंड में भेजा है. जिसके बाद डोनाल्ड ट्रंप नाराज हो गए हैं.
वहीं, नाराज डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी है. ट्रंप ने कहा है कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड जैसे देशों पर यह टैरिफ 1 फरवरी से शुरू होगा. अगर इन देशों ने विरोध किया तो टैरिफ जून में बढ़ाकर 25% तक कर दिया जाएगा.
वहीं, अब ये घटनाक्रम नाटो के 75 साल के इतिहास में सबसे गंभीर और बड़े संकट के रूप में सामने आया है. टेक्सास के रिपब्लिकन सांसद माइकल मैककॉल ने कहा कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर हमला करता है तो यह नाटो के अनुच्छेद 5 को पलट देगा. इसके बाद अमेरिका और नाटो में लड़ाई भी छिड़ सकती है. वहीं, दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि चीन और रूस से बचाव के लिए ग्रीनलैंड का अधिग्रहण जरूरी है.
क्या है NATO?
NATO एक सैन्य संगठन है. नाटो का पूरा नाम उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी (North Atlantic Treaty Organization) है. इसका गठन 1949 में बेल्जियम के ब्रुसेल्स में किया गया था. ब्रुसेल्स (Brussels) में ही इसका मुख्यालय है. उस वक्त अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और फ्रांस समेंत 12 देशों ने मिलकर इसका गठन किया था.
बता दें कि नाटो के पास खुद की सेना नहीं है बल्कि इसकी सेना इसमें शामिल देशों की सेना होती है. उदाहरण के तौर पर अगर किसी सदस्य देश पर हमला होता है और नाटो उस देश में लड़ाई के लिए उतरता है तो इसका मतलब है कि नाटो में शामिल सभी देशों की सेना उस लड़ाई में एक होकर उतरेगी. यानी तब वो इस देश की सेना ना होकर नाटो की सेना होगी.
NATO में कितने देश हैं शामिल?
बता दें कि NATO के गठन के समय इसमें सिर्फ 12 देश ही थे लेकिन अब इसमें कुल 32 देश सदस्य हैं. जिसमें अल्बानिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, कनाडा, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आइसलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, मोंटेनेग्रो, नीदरलैंड, उत्तरी मैसेडोनिया, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, और संयुक्त राज्य अमेरिका.
अगर टूटा NATO तो भारत को क्या होगा फायदा?
दरअसल, अगर नाटो कमजोर हुआ तो इसका असर पश्चिमी देशों की सामूहिक दबाव क्षमता पर पड़ेगा. NATO के कमजोर होने से भारत को रूस और ईरान जैसे देशों के अपने रिश्ते और ज्यादा बेहतर बनाने के लिए ज्यादा छूट मिलेगी.
वहीं, भारत एक मल्टी पोलर दुनिया का समर्थक है. नाटो के कमजोर होने से अमेरिका केंद्रित व्यवस्था कमजोर होगी, जो भारत की सोच के अनुकूल है. नाटो का मुख्य विरोधी रूस है और अगर संगठन कमजोर हुआ तो भारत-रूस रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर दबाव कम होगा.
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