दुनिया का सबसे विशाल और आधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड इन दिनों चर्चा में है. इसे समंदर पर तैरता हुआ एक अभेद्य किला कहा जाता है जो करीब 1090 फीट लंबा है और 1 लाख टन वजनी है. यह दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत है जिसे अमेरिकी नौसेना ने अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए तैयार किया है. हाल ही में इस महाशक्तिशाली जहाज को भूमध्य सागर में रात के अंधेरे में भी लड़ाकू विमानों के साथ युद्धाभ्यास करते देखा गया है जो इसकी जबरदस्त युद्धक तैयारी को दर्शाता है.
90 लड़ाकू विमान और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी
यूएसएस फोर्ड की सबसे बड़ी ताकत इस पर तैनात होने वाले 75 से 90 लड़ाकू विमान हैं. इसमें पुरानी स्टीम तकनीक की जगह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम यानी ईएमएएलएस का इस्तेमाल किया गया है जिससे विमानों को तेजी से लॉन्च किया जा सकता है. यह तकनीक विमानों के उड़ने और उतरने की प्रक्रिया को और भी घातक और सटीक बना देती है. रात के मिशन हों या दिन के, यह जहाज दुश्मन की हर चाल को नाकाम करने के लिए एडवांस रडार सिस्टम और हथियारों से लैस है.
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असीमित रेंज और परमाणु शक्ति से लैस
इस परमाणु संचालित विमानवाहक पोत में दो आधुनिक न्यूक्लियर रिएक्टर लगे हैं जो इसे असीमित रेंज और जबरदस्त रफ्तार प्रदान करते हैं. इसकी टॉप स्पीड 30 नॉट यानी करीब 55 किलोमीटर प्रति घंटा से भी ज्यादा है. परमाणु ऊर्जा की वजह से इसे बार-बार ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती और यह लगातार 50 सालों तक सेवा दे सकता है. इसमें 25 डेक बने हैं जो हजारों सैनिकों और भारी हथियारों को एक साथ ढोने की क्षमता रखते हैं जो इसे किसी भी देश के लिए बड़ा खतरा बनाते हैं.
सुरक्षा का ऐसा चक्र जिसे भेदना नामुमकिन
अपनी सुरक्षा के लिए यूएसएस फोर्ड मिसाइलों और एंटी-मिसाइल गन सिस्टम से लैस है. इसमें सी-स्पैरो मिसाइल और रोलिंग एयरफ्रेम मिसाइल जैसी घातक प्रणालियां लगी हैं जो दुश्मन के किसी भी हमले को हवा में ही ध्वस्त कर सकती हैं. इसके अलावा इसमें ऑटोमैटिक मशीन गन और एडवांस रडार लगे हैं जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही खतरे को पहचान लेते हैं. अमेरिकी नौसेना का लक्ष्य ऐसे 10 और जहाज बनाने का है ताकि पूरी दुनिया के समंदरों पर अपनी बादशाहत कायम रखी जा सके.