USA Withdraws From WHO: अमेरिका ने खुद को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अलग कर लिया है. जिनेवा में संगठन के हेडक्वार्टर से अपने देश का झंडा भी हटा लिया है. अमेरिका के स्वास्थ्य और विदेश विभाग ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी करके ट्रंप सरकार के फैसले की पुष्टि की और बताया कि अमेरिका अब WHO से बाहर हो गया है, लेकिन संगठन को 2600 करोड़ का बकाया चुकाएगा. राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस संबंध में एक कार्यकारी आदेश साइन करके लागू कर दिया है.
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अमेरिका को खरबों डॉलर का नुकसान
वहीं अमेरिका ने संगठन होने का फैसला इसके इंफोर्मेशन मैनेजमेंट के विफल होने के कारण लिया है. इंफोर्मेशन को कंट्रोल, मैनेज और शेयर करने की विफलता के कारण अमेरिका को खरबों डॉलर का नुकसान हुआ और राष्ट्रपति ट्रंन को WHO को कोई फंड, समर्थन या संसाधनों की सहायता रोकने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करना पड़ा. इसलिए जनवरी 2025 में एक साल पहले ही WHO को नोटिस दे दिया गया था कि अमेरिका संगठन से अलग होगा और सभी बकाया भी चुकाएगा.
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अमेरिका था फंड का सबसे बड़ा सोर्स
बता दें कि विशेषज्ञों ने अमेरिका के WHO के अलग होने के फैसले से न सिर्फ संगठन पर असर पड़ेगा, बल्कि अमेरिका और पूरी दुनिया इससे प्रभावित होगी. संगठन के लिए बजट का संकट पैदा होगा. क्योंकि अमेरिका संगठन का सबसे बड़ा आर्थिक सहयोगी था और संगठन को अमेरिका से कुल फंडिंग का करीब 18 प्रतिशत फंड मिलता था, जो अब नहीं मिल पाएगा, जिस वजह से खतरों का पता लगाने, रोकथाम करने और उनका जवाब देने के लिए बनाया गया सिस्टम कमजोर होगा.
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दोबारा शामिल होने की कोई योजना नहीं
अमेरिकी स्वास्थ्य विभा ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका की अब इस संगठन में शामिल होने की कोई योजना नहीं है. पिछले एक साल से संगठन को चेतावनी दी जा रही थी कि मैनेजमेंट फेल होने से अमेरिका और दुनियाभर को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं का नुकसान हो रहा है, लेकिन संगठन माना नहीं. वहीं WHO के प्रवक्ता ने अमेरिका के अलग होने के फैसले पर कहा है कि फरवरी में होने वाली कार्यकारी बोर्ड की बैठक में अमेरिका के बाहर निकलने और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे.