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सीरिया में अमेरिका का बड़ा हमला, 15 दिन में ISIS के 30 ठिकानों पर किए 10 अटैक, US आर्मी ने बताई वजह

US Army Attack: अमेरिका ने जहां ईरान पर हमला करने की तैयारी की हुई है। वहीं अमेरिका की नौसेना सीरिया में आतंकी संगठन ISIS के ठिकानों पर हमला कर रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमलों की पुष्टि करते हुए हमले किए जाने के पीछे की वजह भी बताई।

आतंकियों ने अमेरिकी सेना के जवानों पर घात लगाकर हमला किया था।

US Army Attacks Syria: अमेरिका की नौसेना में सीरिया में बड़ा हमला किया है। इस्लामिक स्टेट (ISIS) के ठिकानों को टारगेट करके बमबारी की। पिछले 15 दिन में करीब 30 ठिकानों पर 10 बार हमले किए किए गए, जिससे आतंकी संगठन के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और हथियारों का स्टॉक भी बर्बाद हुआ। कई आतंकियों के मारे जाने की भी खबर है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खुद हमलों की पुष्टि की और हमले करने के पीछे की वजह भी बताई।

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अमेरिकी सेना पर हमले का बदला लिया

अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से बताया गया कि ISIS के ठिकानों पर हमला पिछले साल अमेरिका के सैनिक पर हुए हमले का बदला लेने के लिए किया गया था। उस हमले में अमेरिका के 2 सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हुई थी। दिसंबर 2025 में हमला हुआ था, जिसके जवाब में अमेरिका ने हमला किया और तब से अब तक 100 ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। हमलों में ISIS के करीब 50 लोग मारे गए। आगे भी ऐसे ही हमले जारी रहेंगे।

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अमेरिका के सैन्य बेस पर कब्जा किया

वहीं सीरिया के रक्षा मंत्रालय ने ऐलान किया है कि देश के पूर्वी हिस्से में अमेरिका की सेना ने एक सैन्य अड्डा बनाया था, जिस पर सीरिया की सेना ने कब्जा कर लिया है। पिछले कई साल से ISISI के ठिकानों पर इसी सैन्य बेस से हमले किए जा रहे थे। साल 2014 में सीरिया और इराक में हमले के लिए अमेरिकी सेना ने इस बेस का इस्तेमाल किया था। दूसरी ओर अमेरिका की सेना ने ISIS के हजारों बंदियों को ईराक में शिफ्ट करने का काम भी पूरा कर लिया है।

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बगदाद की जेल में शिफ्ट कए गए बंदी

सीरियाई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बगदाद के अनुरोध पर उन बंदियों को ईराक भेज गया है, जहां उन पर केस चलाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इन बंदियों को बगदाद की अल-करख जेल में शिफ्ट किया गया है, जो अमेरिकी सेना का एक नजरबंदी केंद्र हुआ करता था। इस केंद्र को कैंप क्रॉपर कहते थे और इसी सेंटर में अमेरिका सेना ने सद्दाम हुसैन को फांसी देने से पहले रखा था। सीरिया की सुरक्षा के लिए बंदियों को ईराक शिफ्ट करना बेहद जरूरी था।


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