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तीन मुस्लिम देशों ने ट्रंप को दिखाया ठेंगा, ईरान पर हमला किया तो नहीं देंगे अमेरिका का साथ

Iran America Tussle: यूएई, सऊदी अरब और कतर ने अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए अपने सैन्य ठिकानों और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल से इनकार कर दिया है. खाड़ी देशों ने बातचीत और शांति पर जोर दिया है. इस फैसले की क्या वजह है, पढ़िए इस रिपोर्ट में.

Credit: Social Media

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका को बड़ा झटका लगा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ये सपना देख रहे हैं कि वो खामेनेई शासन को खत्म कर देंगे. इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और कतर ने साफ कर दिया है कि वो ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के मिलिट्री एक्शन के लिए अपने सैन्य ठिकानों या एयर स्पेस का इस्तेमाल अमेरिका को नहीं करने देंगे. जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य विकल्पों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन खाड़ी देशों के इस रुख से अमेरिका की रणनीति को ठेंस पहुंची है. यूएई के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि वो किसी भी दूसरे देश के खिलाफ हमले के लिए अपनी जमीन, समुद्र या आसमान का इस्तेमाल नहीं होने देगा.

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सऊदी अरब और कतर ने क्यों लिया फैसला?

सऊदी अरब और कतर ने भी इसी तरह का रुख अपनाया है. इन देशों का कहना है कि वो युद्ध या हिंसा नहीं चाहते. उनका मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही होना चाहिए. सऊदी अरब, UAE और कतर को ये डर भी सता रहा है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो वो तीनों भी निशाने पर आएंगे. खाड़ी देशों ने ये भी साफ किया कि युद्ध से पूरे इलाके में अस्थिरता फैल सकती है, जिसका असर आम लोगों पर पड़ेगा. दरअसल खाड़ी से ईरान तक का सबसे आसान शॉर्टकट सऊदी एयरस्पेस से होकर गुजरता है. अब सऊदी ने अमेरिका के लिए ये ऑप्शन बंद कर दिया है तो उसके फाइटर जेट्स को ईरान तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर काटना पड़ेगा, जिससे ऑपरेशन काफी महंगा और मुश्किल बन जाएगा.

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अमेरिका के लिए बड़ा झटका

कतर में अमेरिका का सबसे बड़ा मिलिट्री अड्डा अल-उदीद है, जहां हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. कतर ने साफ कह दिया है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो वो इस अड्डे का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. कतर का कहना है कि वो अपने नागरिकों और देश की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा. सऊदी अरब, UAE और कतर के संबंध अमेरिका से अच्छे रहे हैं. तीनों ने अमेरिका के साथ कई मिलिट्री डील की हैं. लेकिन अब ये इसलिए अमेरिका का साथ नहीं दे रहे ताकि युद्ध को रोका जा सके. अगर अमेरिका हमला करता है तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, खाड़ी देशों की इकॉनोमी पर भी इसका असर पड़ सकता है. ऐसे में तीनों देशों ने अमेरिका का साथ ना देना ही सही समझा और उनके इस फैसले से ईरान को बड़ी राहत मिली है.

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