पड़ोसी देश पाकिस्तान का करीबी साथी तुर्किये इस समय एक बड़े जनसांख्यिकीय संकट से जूझ रहा है. मुमकिन है कि यह दुनिया का इकलौता ऐसा मुस्लिम देश है जहां आबादी बढ़ने के बजाय तेजी से गिर रही है. तुर्की सांख्यिकीय संस्थान के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 2024 में यहां की प्रजनन दर गिरकर मात्र 1.48 रह गई है, जो जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए जरूरी 2.1 के स्तर से बहुत नीचे है. पिछले 25 सालों में यह गिरावट इतनी डरावनी है कि राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने इसे देश के वजूद के लिए एक बड़ी तबाही और खतरा करार दिया है.
तुर्किये में जन्म दर घटने की वजह
तुर्किये में जन्म दर घटने के पीछे कई गहरे आर्थिक और सामाजिक कारण छिपे हैं. देश में बढ़ती महंगाई, घर खरीदने की भारी लागत और नौकरी को लेकर असुरक्षा के चलते युवा अब परिवार बढ़ाने से कतरा रहे हैं. इसके अलावा महिलाओं में बढ़ती उच्च शिक्षा और करियर को प्राथमिकता देने की सोच ने भी शादी और बच्चों के फैसले को पीछे धकेल दिया है. शहरों में रहने वाले परिवार अब एक या दो बच्चों तक ही सीमित हो रहे हैं. यही वजह है कि तुर्किये पिछले 10 सालों में दुनिया के उन टॉप 5 देशों में शामिल हो गया है जहां जन्म दर सबसे तेजी से गिरी है.
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तुर्किये की आबादी
तुर्किये की आबादी भले ही 8.6 करोड़ से ज्यादा हो लेकिन वहां बुजुर्गों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. वर्तमान में 65 साल से ऊपर के लोग आबादी का 10.6 प्रतिशत हिस्सा हैं, और अनुमान है कि 2050 तक हर चौथा व्यक्ति बुजुर्ग होगा. सरकार को डर है कि उनका 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' यानी कामकाजी युवाओं का फायदा 2035 तक खत्म हो जाएगा. अगर युवा आबादी कम हुई तो देश की पेंशन व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ेगा. गांवों से युवाओं का पलायन और शहरों में घटती जन्म दर ने इस समस्या को अस्तित्व का सवाल बना दिया है.
सरकार ने की 3 बच्चों की अपील
इस संकट से निपटने के लिए राष्ट्रपति एर्दोगन ने 2026 से 2035 को 'परिवार और जनसंख्या दशक' घोषित किया है. सरकार ने आबादी बढ़ाने के लिए खजाना खोल दिया है, जिसमें पहले बच्चे पर 5,000 लीरा का भुगतान और नवविवाहितों को 1.5 लाख लीरा तक का ब्याज मुक्त कर्ज शामिल है. एर्दोगन लंबे समय से हर परिवार से कम से कम 3 बच्चे पैदा करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन आर्थिक दबाव के चलते ये योजनाएं अब तक नाकाम साबित हो रही हैं. तुर्किये अब उसी मोड़ पर खड़ा है जहां चीन और जापान जैसे देश बरसों से संघर्ष कर रहे हैं.