अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीयों के लिए एक बहुत बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने सोमवार 9 फरवरी 2026 को अमेरिकी संसद में ‘एक्साईल एक्ट’ (EXILE Act) पेश किया है. इस विधेयक का सीधा मकसद विदेशी कामगारों को मिलने वाले एच1बी (H1B) वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह से खत्म करना है. सांसद का कहना है कि यह प्रोग्राम अमेरिकी नागरिकों के हक मार रहा है और कंपनियां अपने फायदे के लिए सस्ते विदेशी कर्मचारियों को बुलाकर स्थानीय लोगों की नौकरियां छीन रही हैं.
2027 से वीजा संख्या शून्य करने का प्रस्ताव
इस नए विधेयक में प्रस्ताव दिया गया है कि साल 2027 से हर वित्तीय वर्ष में एच1बी वीजा की संख्या को घटाकर शून्य कर दिया जाए. सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लंबे समय से इस सिस्टम का दुरुपयोग हो रहा है जिससे अमेरिका के पढ़े-लिखे युवाओं को अच्छी सैलरी वाली नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं. उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और डिजनी जैसी बड़ी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी कामगारों के चक्कर में हजारों अमेरिकी कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. विधेयक के अनुसार अब अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देने का समय आ गया है.
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भारतीयों के लिए सबसे बड़ा झटका
अगर यह बिल कानून बनता है तो इसका सबसे बुरा असर भारतीयों पर पड़ेगा क्योंकि एच1बी वीजा हासिल करने वालों में करीब 70 प्रतिशत हिस्सा भारतीयों का है. यह एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को इंजीनियरिंग, मेडिकल और फाइनेंस जैसे खास क्षेत्रों में विदेशी एक्सपर्ट्स को नियुक्त करने की इजाजत देता है. भारत के हजारों युवा हर साल इसी वीजा के जरिए अमेरिका जाकर अपने करियर को नई उड़ान देते हैं. ऐसे में इस प्रोग्राम के बंद होने से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और डॉक्टर्स के लिए अमेरिका के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं.
अभी लंबी है कानूनी प्रक्रिया
फिलहाल भारतीय प्रोफेशनल्स को एकदम घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह विधेयक अभी सिर्फ अमेरिकी संसद के निचले सदन में पेश हुआ है. अभी इस पर कोई बहस या वोटिंग नहीं हुई है. सबसे पहले इसे संबंधित कमेटी के पास भेजा जाएगा जो तय करेगी कि इस पर चर्चा होनी चाहिए या नहीं. अगर यह वहां से पास हो भी जाता है तो इसे ऊपरी सदन यानी सीनेट की मंजूरी लेनी होगी. हालांकि ट्रंप प्रशासन के सख्त रुख को देखते हुए इस बिल ने दुनिया भर के टेक जगत और भारतीय युवाओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है.
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