बांग्लादेश में हिंसा के बीच 17 साल बाद बीएनपी के तारिक रहमान की आज वतन वापसी हुई है. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान सिलहट के उस्मानी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जाइमा रहमान के साथ पहुंचे. बीएनपी के कार्यकर्ता और समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया. इस दौरान तारिक ने एक रैली को भी संबोधित किया.
जहां एक ओर बांग्लादेश हिंसा की आग में जल रहा है, तो वहीं दूसरी ओर बीएनपी समर्थकों ने पूरे ढाका में हजारों की संख्या में पोस्टर्स और बैनर्स लगा दिए हैं. तारिक रहमान की वापसी के बाद 12 फरवरी को बांग्लादेश में प्रस्तावित चुनाव को लेकर बीएनपी समर्थकों का जोश चरम पर है और बीएनपी समर्थक बहुत ही उत्साहित हैं.
वहीं, फरवरी में बांग्लादेश में होने वाले चुनाव भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. दिल्ली के लिए तारिक रहमान की वापसी बहुत मायने रखती है. खासकर जब भारत समर्थक अवामी लीग पर चुनाव लड़ने से रोक लगा दिया गया है और खादिला जिया अस्पताल में भर्ती हैं.
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमले
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. दीपू चंद्र दास की हत्या के महज कुछ दिनों बाद एक और खौफनाक घटना ने दुनिया को हिलाकर रख दिया. अमृत मंडल नाम के हिंदू युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. आरोप है कि वह एक स्थानीय निवासी शाहिदुल इस्लाम के घर लूटपाट करने पहुंचा था. स्थानीय लोगों का कहना है कि अमृत ने लंबे समय से भारत में छिपकर रहने के बाद हाल ही में लौटकर शाहिदुल से फिरौती मांगी थी और मंगलवार रात उसके साथ उसके गुट के लोग पैसे वसूलने घर पहुंचे.
यह भी पढ़ें- ‘बांग्लादेश की पहली प्राथमिकता…’, 17 साल बाद वतन लौटे तारिक रहमान ने रैली में क्या कहा?
जमात-ए-इस्लामी भारत के लिए क्यों बनी चिंता?
भारत के लिए खास चिंता जमात-ए-इस्लामी है. जमात-ए-इस्लामी को पाकिस्तान की आईएसआई का समर्थक माना जाता है. यूनुस की बांग्लादेश में वापसी के बाद जमात-ए-इस्लामी पर से प्रतिबंध हटा लिया गया है और जमात-ए-इस्लामी ने राजनीति में वापसी कर ली है. हाल ही में बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी ने अपनी ताकत एक बार फिर से बढ़ा ली है.
बांग्लादेश में यूनुस के नेतृत्व में कट्टरपंथी ताकतें बढ़ रही हैं. ऐसे में भारत जमात और यूनुस की तुलना में बीएनपी को ज्यादा लिबरल और डेमोक्रेटिक ऑप्शन के तौर पर देख रहा है, हालांकि पिछले दिनों भारत और बीएनपी के रिश्ते अच्छे नहीं थे, लेकिन हाल के वर्षों में बीएनपी के भारत विरोधी तेवर में कमी आई है.
कौन हैं तारिक रहमान?
बता दें कि तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति रहे जियाउर रहमान और तीन बार प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं. तारिक रहमान को बांग्लादेश की राजनीति का ‘क्राउन प्रिंस’ कहा जा रहा है. वैसे तो उनकी वापसी फरवरी 2026 में संसदीय चुनावों के दौरान होने वाली थी, लेकिन बदली परिस्थितियों के बीच वह 25 दिसंबर को ही ब्रिटेन से वापस आ गए.
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