अमेरिका में हाल ही में अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा काफी कम हो गया है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीतियों के बीच अमेरिकी जनता अब सरकार और भविष्य को लेकर परेशान है. इसकी वजह महंगाई, नौकरियों की कमी और लोगों की घटती उम्मीदें हैं. जनवरी 2026 में यूएस कॉन्फ्रेंस बोर्ड का कॉन्फिडेंस इंडेक्स 84.5 तक गिर गया है, जो 2014 के बाद सबसे कम स्तर है. ये इस बात की ओर इशारा करता है कि आम अमेरिकी नागरिक अर्थव्यवस्था को लेकर न केवल निराश हैं, बल्कि उन्हें आने वाले वक्त को लेकर भी डर सता रहा है. जनता का कहना है की रोजमर्रा की चीजें बहुत महंगी हो गई हैं. किराना, घरेलू सामान और बाकी जरुरत की चीजों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने लोगों की जेब पर भारी असर डाला है. इस वजह से आम परिवारों को अपने बजट को बैलेंस करना मुश्किल हो रहा है.
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बेरोजगारी और नौकरी की चुनौतियां
नौकरी के अवसर भी पहले जैसे नहीं रहे. दिसंबर 2025 में लगभग 50,000 नई नौकरियां ही बनीं, जो पिछले महीनों की तुलना में कम है. 2024 में नौकरियों की कुल संख्या 20 लाख से ज्यादा थी, लेकिन 2025 में ये सिर्फ 6 लाख के आसपास रह गई. इससे पता चलता है कि रोजगार के नए अवसर कम हो रहे हैं और कई लोगों को नौकरी पाने में कठिनाईयां हो रही हैं. कॉन्फिडेंस इंडेक्स के घटने से ऐसा लगता है कि अमेरिकी जनता तेजी से बदलती आर्थिक परिस्थितियों को लेकर परेशान है. इंडेक्स के सभी पांच घटक अपने निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे लगता है कि इस वक्त लोग कोरोना महामारी से भी ज्यादा निराश हैं.
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क्या मंदी आने वाली है?
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने व्यापार नीतियों में बदलाव किए हैं, जिनमें टैरिफ और कड़े इमिग्रेशन नियम शामिल हैं. ट्रंप का कहना है कि ये कदम अमेरिका को आर्थिक फायदा पहुंचाएंगे, लेकिन जनता इस दावे पर भरोसा नहीं कर पा रही है. जहां विशेषज्ञ अभी सीधे तौर पर मंदी की घोषणा नहीं कर रहे, वहीं अर्थव्यवस्था में गिरती उपभोक्ता विश्वास दर, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से ये अनुमान लगाया जा रहा है कि आर्थिक विकास धीमा पड़ सकता है. अमेरिकी जनता की बदलती सोच ये चेतावनी दे रही है कि अगर ये स्थिति लगातार बनी रही, तो आर्थिक मंदी के संकेत और मजबूत हो सकते हैं.
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