बांग्लदेश में तख्तापलट के चलते एक साल पहले पीएम शेख हसीना ने देश छोड़ दिया था। तब से वह भारत में शरण लिए हैं। निर्वासन के बाद पहली शेख हसीना का बयान सामने आया है। उन्होंने एक एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि अवामी लीग के बिना बांग्लादेश में चुनाव कराना देश में आगे और विभाजन के बीज बोएगा। हसीना ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वह आम चुनाव का बहिष्कार करें। बता दें कि अगली साल बांग्लादेश में आम चुनाव होने हैं। तख्तापलट के बाद अभी मो. यूनुस बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं।
हसीना ने आरोप लगाया कि उनका ट्रायल राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने इसे कानूनी मजाक कहा। मो. युनूस की अंतरिम सरकार पर विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने भी एकतरफा कार्रवाई और सांसदीय सुधारों में विफलता जैसे आरोप लगाए हैं।
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शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की बात कर कहा कि वह अपने देश लौटना चाहती हैं, लेकिन तभी जब वहां की सरकार वैध हो। कहा कि वहां संविधान का पालन हो और कानून-व्यवस्था कायम हो। चुनाव पर फिर बात करते हुए कहा कि अगर अवामी लीग को चुनाव लड़ने नहीं दिया तो आम चुनाव का बहिष्कार होगा। पार्टी पर लगे बैन की बात करते हुए शेख हसीना ने कहा कि अवामी लीग पर लगाया गया बैन ना सिर्फ गलत है बल्कि खुद सरकार के लिए नुकसानदायक है। यूनुस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की अगली सरकार को चुनावी वैधता होनी जरूरी है।
बता दें कि पिछले साल अगस्त में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंसा हुई थी। भीड़ इतनी आक्रोशित हो गई थी कि उस समय शेख हसीना के आवास तक पहुंच गई थी। इससे शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना था। हेलिकॉप्टर से शेख हसीना भारत आ गईं थीं। तब से भारत में ही शरण लिए हैं। साल 1975 के सैन्य तख्तापलट में शेख हसीना के पिता और तीन भाइयों की हत्या कर दी गई थी। उस समय शेख हसीना और उनकी बहन विदेश में थीं।
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