पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में स्थित खदीजा तुल कुबरा इमामबाड़ा में जुमे की नमाज के दौरान एक भीषण आत्मघाती हमला हुआ है. पुलिस और सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इस धमाके में करीब 31 लोगों की मौत हो गई है और 169 लोग घायल हैं. बताया जा रहा है कि आत्मघाती हमलावर मस्जिद के अंदर घुसना चाहता था लेकिन मुस्तैद गार्ड्स ने उसे प्रवेश द्वार पर ही रोक लिया. इसके बाद हमलावर ने खुद को गेट पर ही उड़ा लिया जिससे वहां मौजूद नमाजियों के चीथड़े उड़ गए. धमाका इतना जोरदार था कि मस्जिद की खिड़कियों के कांच टूट गए और चारों तरफ मलबा फैल गया.
मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप
इस भयावह घटना के बाद पाकिस्तान के स्थानीय पत्रकारों ने मुख्यधारा की मीडिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पत्रकार एहतेशाम उल हक सहित कई अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि जब राजधानी में खून की नदियां बह रही थीं तब टीवी चैनल्स मनोरंजन के कार्यक्रम और क्रिकेट कमेंट्री दिखाने में व्यस्त थे. पत्रकारों का दावा है कि नेशनल मीडिया ब्लास्ट वाली जगह से रिपोर्टिंग नहीं कर रहा है और जानबूझकर मरने वालों की संख्या कम बता रहा है. उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक और संवेदनहीन व्यवहार बताया है क्योंकि अस्पताल और मस्जिद परिसर घायलों की चीख-पुकार से गूंज रहा है.
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संसदीय कार्य मंत्री ने बताया आतंकी हमला
संसदीय कार्य मंत्री तारिक फजल चौधरी ने इस घटना को एक कायरतापूर्ण आतंकवादी कृत्य करार दिया है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के ऐसे कृत्य देश के मनोबल को कम नहीं कर सकते और अब समय आ गया है कि पूरा देश एकजुट होकर शांति के लिए खड़ा हो. वहीं पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने इसे इंसानियत और मजहब पर हमला बताया है. इस्लामाबाद पुलिस के प्रवक्ता तकी जवाद ने जानकारी दी कि मरने वालों में इस्लामाबाद के आईजी सैयद अली नासिर रिजवी के चचेरे भाई भी शामिल हैं जबकि उनके एक अन्य रिश्तेदार गंभीर रूप से घायल हैं. फिलहाल पूरे शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अस्पतालों में इमरजेंसी लागू है.
शिया समुदाय पर बार-बार हमले
इस्लामाबाद जैसे सुरक्षित शहर में इस तरह का आत्मघाती हमला होना सुरक्षा एजेंसियों पर बड़े सवाल खड़े करता है. हालांकि अब तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिन पाकिस्तान में शिया मुस्लिम समुदाय लंबे समय से कट्टरपंथी समूहों के निशाने पर रहा है. इससे पहले भी सुन्नी चरमपंथी गुट तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ऐसे हमलों में शामिल रहा है. गौरतलब है कि पिछले साल 11 नवंबर को भी इस्लामाबाद में एक आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 12 लोग मारे गए थे. राजधानी में बढ़ती इन घटनाओं ने आम नागरिकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है.
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