Israel Iran US Tension: ईरान के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, क्योंकि वह जंग के मुहाने पर खड़ा है। एक ओर अमेरिका के साथ शांति वार्ता फेल होती दिख रही है और अमेरिका हमला करने के लिए दरवाजे पर खड़ा है। दूसरी ओर, इजरायल अब ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम के पीछे पड़ गया है और हमला करने की धमकी दे रहा है। इजरायल ने अमेरिका को भी साफ कह दिया है कि अगर अमेरिका ने साथ नहीं दिया तो वह अकेले ही ईरान पर अटैक करेगा।
ईरान में सिक्योरिटी लॉकडाउन, जंग की तैयारी
बता दें कि अमेरिका और इजरायल की धमकियों के चलते ईरान ने भी जंग की पूरी तैयारी कर ली है। ईरान में राष्ट्रव्यापी सुरक्षा घेरा लागू है। तेहरान, जाहेदान समेत पूरे देश में सड़कों पर IRGC की यूनिट, सैन्य वाहन और चौकियां तैनात हैं। ईरान सरकार ने विद्रोह, तख्तापलट और अशांति के दौरान चौकियां स्थापित की थीं, जो युद्ध का संकट टलने तक बनी रहेंगी। वहीं मस्जिदों और इस्लामी केंद्रों के आसपास भी अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई है, यानी ईरान हमले का जवाब देने को तैयार है।
अमेरिका के सैन्य ठिकाने ईरान के निशाने पर
बता दें कि अमेरिका की युद्ध की धमकियों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिका को धमकी दी है। उनका कहना है कि अगर अमेरिका की सैन्य तैनाती से ईरान नहीं डरता। अगर अमेरिका ने हमला किया तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करेगा। ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों का टारगेटर मध्य पूर्व के देशों में बने अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं। ईरान की सेना के जवानों की उंगलियां ट्रिगर पर हैं। इधर मिसाइल आएगी और उस मिसाइल जाएगी, तबाही मचाकर रख देंगे।
इजरायल की अमेरिका और ट्रंप को चेतावनी
बता दें कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने की चेतावनी दी है। अमेरिका की तरह इजरायल ने भी ईरान पर फिर से हमला करने की तैयारी कर रखी है। अब नेतन्याहू का कहना है कि युद्ध का समय आ गया है। अमेरिका से इजरायल को सैन्य सहायता देने का आग्रह है। मौजूदा स्थिति निर्णायक मोड़ है। उन्होंने बाइबल का हवाला देते हुए कहा कि बाइबल में कहा गया है, शांति का एक समय होता है और युद्ध का भी और यह युद्ध का ही समय है।
उपराष्ट्रपति वेंस बोले- ट्रंप लेंगे अंतिम फैसला
बता दें कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप अंतिम निर्णय लेंगे कि ईरान के साथ बातचीत में सीमा रेखा कहां खींची जाए। अगर हम ईरानियों के साथ मस्कट में हुई बातचीत को देखें तो राष्ट्रपति ट्रंप वास्तव में एक फायदेमंद समझौता करने की पूरी कोशिश कर रहे थे, जो अमेरिका के लिए भी फायदेमंद होता, लेकिन अगर ईरानी भी समझदारी दिखाते और वह समझौता कर लेते और समझौता करना उनके लिए अच्छा होता।
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