चीन के वैज्ञानिकों ने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक में एलन मस्क को भी पीछे छोड़ दिया है. चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन ब्रेन साइंस एंड इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी (CEBSIT) ने दावा किया है कि अब एक शरीर से पूरी तरह लाचार इंसान भी सिर्फ दिमाग की मदद से किसी भी रोबोट और डिवाइस को अपने काबू में कर सकता है. ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक अब सिर्फ लैब में नहीं बल्कि रियल लाइफ का हिस्सा बन रही है. इससे पहले न्यूरालिकं ने इस तकनीक में कुछ शुरुआती कामयाबी हासिल की थीं जोकि एलन मस्क की कंपनी है.
ये भी पढ़ें: Elon Musk ने जीता 2018 का Tesla पे पैकेज केस, क्या अब बन जाएंगे दुनिया के पहले खरबपति?
मिस्टर झांग पर हुआ था ट्रायल
एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रायल में शामिल हुए मिस्टर झांग नामक व्यक्ति को गिरने से रीढ़ की हड्डी में सीरियस इंजरी हुई थी. 2022 में उनकी गर्दन के नीचे के पूरे शरीर को लकवा मार गया था, जिसकी वजह से वो सिर्फ गर्दन और सिर हिला सकते हैं. इलाज के बाद भी उन्हें कोई फायदा नहीं मिला, फिर वो CEBSIT के क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा बने. जून 2025 में एक सर्जरी के दौरान डॉक्टर्स ने उनके दिमाग में WRS01 नाम का वायरलेस ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस डिवाइस फिट किया. इस डिवाइस को छोटे सेंसर और चिप से बनाया गया है जो ब्रेन की छोटी जगह में फिट बैठ जाता है. सर्जरी के बाद एक स्पेशल टोपी पहनाई जाती है, जो बिना तार के बिजली देकर ब्रेन से सिग्नल लेती है. दो तीन हफ्तों की ट्रेनिंग के बाद ही झांग कंप्यूटर कर्सर को ब्रेन से कंट्रोल करने लगे.
अब बेहतर जिंदगी जी रहे हैं झांग
चीन का प्रयोग इतना सफल रहा कि ट्रायल में शामिल हुए मिस्टर झांग अब दिमाग से चीजों को कंट्रोल कर बेहतर जिंदगी जी रहे हैं. इसी तकनीक की वजह से वो आज जॉब भी कर रहे हैं. झांग ब्रेन से कर्सर को कंट्रोल करते हुए वेंडिंग मशीनों से सामान निकालने की जांच करते हैं. ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी ब्रेन इंप्लांट वाले मरीज को जॉब मिली हो. झांग सिर्फ कंप्यूटर ही नहीं, बल्कि अपनी स्मार्ट व्हीलचेयर को भी दिमाग से कंट्रोल करते हैं. उनके पास एक रोबोट डॉग भी है जिसे कमांड देने पर वो झांग की हर बात मानता है. WRS02 सिस्टम बोलने की क्षमता को भी दिमाग से डिकोड कर पाएगा.
ये भी पढ़ें: कौन हैं एलन मस्क की ‘हॉफ इंडियन’ गर्लफ्रेंड शिवोन जिलिस? भारतीय वैज्ञानिक के नाम पर रखा बेटे का नाम
एक और प्रोजेक्ट पर काम जारी
ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक को सबसे ज्यादा खास बनाती है इसकी स्पीड. शरीर में आमतौर पर 200 मिलीसेकंड में सिग्नल पहुंचता है, लेकिन तकनीक में इसे 100 मिलीसेकंड रखा गया है ताकि कंट्रोल करना आसान रहे. अब चीन में 256 चैनल वाले WRS02 सिस्टम पर काम जारी है, जिसका ट्रायल जल्द शुरू होने की उम्मीद है.
संबंधित खबरें
श्रीलंकाई हिंदू ने इस्लाम को लेकर किया था कमेंट, सऊदी ने सुनाई मौत की सजा
1 hr agoUS में 13 लोगों को गोलियों से भूनने वाले को सब के सामने मिलेगी मौत की सजा
6 hrs agoअमेरिकी मिडटर्म चुनाव तक ईरान पर नहीं होगा कोई अटैक, ट्रंप ने किया ऐलान
15 hrs agoInfosys, HCL समेत कई भारतीय कंपनियां US के ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड
16 hrs agoफ्लाईदुबई घटना के बाद इजरायल की बढ़ी मुश्किलें, खतरे में वीजा-फ्री सुविधा
19 hrs agoकैनेडियन कवयित्री ऐनी कार्सन को मिलेगा साहित्य का नोबेल पुरस्कार
21 hrs agoक्या ट्रंप को सचमुच मिल सकता है नोबेल पीस प्राइज? जानिए कितनी है संभावना
23 hrs ago'मैंने 8 युद्ध खत्म कराए' ट्रंप ने फिर ठोकी नोबेल पीस प्राइज की दावेदारी
1 day agoनक्शे से ईरान को मिटाने के चक्कर में US को करोड़ों का नुकसान!
1 day agoकेमिस्ट्री के क्षेत्र में नोबेल अवार्ड का ऐलान, हेनरी व केंसो सोई को सम्मान
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines