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‘बंद करो ये घुसपैठ…’, टेक्सास में हनुमान जी की विशाल मूर्ति देख भड़के ट्रंप समर्थक, सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

अमेरिका के टेक्सास स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की एक 90 फुट ऊंची मूर्ति लगाई गई है, जिसके बाद से ही अमेरिका के कंजर्वेटिव क्लास ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. बता दें कि मंदिर में लगी हनुमान जी की मूर्ति पर लोगों ने कमेंट किए. शुगर लैंड की इस 90 फुट ऊंची मूर्ति को एक एक्टिविस्ट ने भारतीयों की अमेरिकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश बताया है. जिसके बाद गुस्साएं भारतीयों ने भी उन्हें जवाब दिया है.

अमेरिका के टेक्सास स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की एक 90 फुट ऊंची मूर्ति लगाई गई है, जिसके बाद से ही अमेरिका के कंजर्वेटिव क्लास ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. बता दें कि मंदिर में लगी हनुमान जी की मूर्ति पर लोगों ने कमेंट किए. शुगर लैंड की इस 90 फुट ऊंची मूर्ति को एक एक्टिविस्ट ने भारतीयों की अमेरिकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश बताया है. जिसके बाद गुस्साएं भारतीयों ने भी उन्हें जवाब दिया है.

MAGA मूवमेंट से जुड़े टेक्सास के पॉलिटिकल एक्टिविस्ट ने ह्यूस्टन के पास शुगर लैंड में श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में 90 फुट की मूर्ति का वीडियो पोस्ट करते हुए कहा, 'यह इस्लामाबाद, पाकिस्तान या नई दिल्ली, इंडिया नहीं है. यह शुगर लैंड, टेक्सास है. थर्ड वर्ल्ड एलियंस धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं. US में तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति यह क्यों है??! हमला बंद करो!"

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गुस्साएं भारतीयों ने कहा कि इस मूर्ति को हिंदुओं ने अपनी निजी जमीन पर बनाया है. ऐसे में उनको इस तरह का कमेंट नहीं करना चाहिए.

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डलास-फोर्ट वर्थ इलाके के रिपब्लिकन एक्टिविस्ट और मागा समर्थक कार्लोस टर्सियोस ने एक्स पर भगवान हनुमान की मूर्ति का वीडियो शेयर किया है. वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, 'थर्ड वर्ल्ड के एलियंस धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं. अमेरिका के लोगों को इस कब्जे को रोकने के लिए सामने आने की जरूरत है.'

भारतीयों ने दिया करारा जवाब

कार्लोस टर्सियोस के पोस्ट पर भारतीय मूल के अमेरिकियों ने भी कड़ा जवाब दिया है. भारतीयों ने उनके पोस्ट पर लिखा कि आपका दावा बिल्कुल गलत है. वहीं, एक अन्य यूजर ने कार्लोस के पोस्ट पर लिखा, 'हिंदुओं ने अपनी जमीन पर अपने पैसे से मंदिर बनाया है.' वहीं, एक यूजर ने लिखा, 'आप सालों पहले कल्चर वॉर हार गए थे. अब आप मिडटर्म भी हारने वाले हैं. आपका अमेरिका फर्स्ट का धोखा नस्लभेदी और नॉस्टैल्जिया के तौर पर सामने आ गया है.'

पहले के पोस्ट में भारतीयों और मुसलमानों को किया टारगेट

इस विवाद ने टर्सियोस के पहले के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी लोगों का ध्यान खींचा, जिसमें उन्होंने इमिग्रेंट्स, खासकर टेक्सास में भारतीयों और मुसलमानों की बुराई की थी. पिछले मैसेज में, उन्होंने H-1B वीजा पर भारतीय टेक वर्कर्स के बारे में शिकायत की थी और अमेरिकी शहरों में इस्लामिक असर की चेतावनी दी थी और फिर से "हमले को रोकें" लाइन का इस्तेमाल किया था.

ऐसी ही एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'फ्रिस्को के लोग शहर की सरकार से थक चुके हैं जो भारत से H-1B वर्कर्स को इंपोर्ट कर रही है, जबकि अमेरिकी लोग घर खरीदने या नौकरी पाने में भी सक्षम नहीं हैं. यहां, एक निवासी थर्ड-वर्ल्ड-एलियंस द्वारा किए गए फ्रॉड और गलत इस्तेमाल के बारे में बता रहा है.'

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, 'यह इस्लामाबाद, पाकिस्तान या काबुल, अफगानिस्तान नहीं है. यह ह्यूस्टन, टेक्सास है. इस्लाम और शरिया कानून टेक्सास और अमेरिका के कई हिस्सों पर कब्जा कर रहा है!! हम शरिया कानून के लिए कॉन्फ्रेंस क्यों करते हैं??! हमला बंद करो!.'


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