ईरान ने एक साथ 7 देशों में अमेरिकी बेस पर किया हमला, UAE के अल धाफरा एयर बेस पर भारी तबाही
Author: Raja Alam
Feb 28, 2026 03:33 PM IST
ईरान ने इजरायल और अमेरिका के हमलों का बेहद खौफनाक जवाब दिया है. ईरान की ओर से एक साथ सात अलग-अलग देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है. ईरान ऑब्जर्वर की ब्रेकिंग रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सेना ने अपनी घातक बैलिस्टिक मिसाइलों का मुंह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर खोल दिया है. इस हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है क्योंकि यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े और व्यापक मिसाइल हमलों में से एक माना जा रहा है. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता पर हुए हमले का बदला लेने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है.
UAE में भारी तबाही
ईरानी हमलों की सबसे बड़ी खबर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आई है. यहां स्थित अमेरिका के प्रमुख ‘अल धाफरा’ एयर बेस पर ईरान ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं. इस हमले में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान पहुंचने की खबरें मिल रही हैं. अल धाफरा बेस अमेरिका के लिए इस क्षेत्र में सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और वहां से उसकी वायुसेना का बड़ा संचालन होता है. मिसाइलें गिरने के बाद वहां आग की लपटें और धुएं का गुबार आसमान छूता देखा गया. इस हमले ने खाड़ी देशों में अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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इजरायल और खाड़ी देशों में कोहराम
ईरान की मिसाइलों ने केवल यूएई ही नहीं, बल्कि इजरायल, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, जॉर्डन और कुवैत में स्थित अमेरिकी ठिकानों को भी अपना निशाना बनाया है. इन सभी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर एक के बाद एक कई धमाके हुए हैं. विशेष रूप से कतर और कुवैत जैसे देशों में, जहां अमेरिका की बड़ी सैन्य मौजूदगी है, वहां हालात बहुत तनावपूर्ण हो गए हैं. इजरायल में भी ईरानी मिसाइलों के पहुंचने के बाद सुरक्षा अलार्म बजने लगे और लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने लगे.
दुनिया पर मंडराया तीसरे विश्व युद्ध का खतरा
ईरान के इस व्यापक पलटवार के बाद अब स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है. जिन सात देशों में हमले हुए हैं, वहां अफरा-तफरी का माहौल है और अमेरिका अपनी अगली रणनीति तैयार करने में जुटा है. ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक देगा. विशेषज्ञों का मानना है कि सात देशों में एक साथ हमला करना इस बात का संकेत है कि अब यह लड़ाई केवल दो देशों के बीच नहीं रही, बल्कि एक बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध में तब्दील हो सकती है. पूरी दुनिया अब सांस रोककर देख रही है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस विनाशकारी हमले का क्या जवाब देते हैं.