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12 दिन की जंग के बाद भी ईरानी सत्ता मजबूत, खुफिया विभाग की रिपोर्ट से टेंशन में अमेरिका

अमेरिका और इजराइल की लगभग 12 दिनों से लगातार बमबारी के बावजूद ईरान की सरकार अभी भी मजबूत है और उसके पतन का कोई खतरा नहीं है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है.

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ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण युद्ध और पिछले दो हफ्तों से जारी अमेरिका-इजरायल की भारी बमबारी के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. खुफिया रिपोर्टों के विश्लेषण से पता चला है कि लगभग 12 दिनों के निरंतर सैन्य अभियानों के बावजूद ईरान का नेतृत्व मोटे तौर पर बरकरार है. सूत्रों के अनुसार, खुफिया समुदाय का मानना है कि ईरानी शासन ने देश की जनता पर अपना नियंत्रण अभी भी बना रखा है. 28 फरवरी को शुरू हुए हमलों में भले ही ईरान के बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा हो, लेकिन वहां की सत्ता की संरचना इतनी गहरी है कि वह इतनी आसानी से टूटने वाली नहीं है.

मुजतबा खामेनेई और IRGC का नया चक्रव्यूह

रिपोर्ट पिछले कुछ दिनों में ही तैयार हुई है. रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि खामेनेई के अलावा दर्जनों सीनियर अधिकारी और IRGC के उच्च रैंकिंग कमांडर भी मारे गए. फिर भी अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स बताती हैं कि IRGC और खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संभालने वाले अंतरिम नेता अभी भी देश पर नियंत्रण रखे हुए हैं. अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया जाना शासन की निरंतरता का संकेत है. स्थिति मैदान पर लगातार बदल रही है, लेकिन फिलहाल ईरानी नेतृत्व पूरी तरह बरकरार है. IRGC और अंतरिम नेतृत्व अभी भी देश के सुरक्षा तंत्र और अर्थव्यवस्था पर पकड़ बनाए हुए हैं.

युद्ध खत्म करने का दबाव, पर लक्ष्य अब भी दूर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ते तेल की कीमतों और राजनीतिक दबाव के चलते इस युद्ध को ‘जल्द’ समाप्त करने के संकेत दिए हैं. हालांकि, खुफिया रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि कट्टरपंथी नेतृत्व अपनी जगह मजबूती से जमा रहता है, तो युद्ध का कोई स्वीकार्य अंत ढूंढना मुश्किल हो सकता है. इजरायली अधिकारियों ने भी गोपनीय चर्चाओं में स्वीकार किया है कि केवल हवाई हमलों से शासन का तख्तापलट होगा, इसकी कोई निश्चितता नहीं है.

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रेजीम चेंज का लक्ष्य नहीं

युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका-इजराइल ने ईरान के एयर डिफेंस, न्यूक्लियर साइट्स और सीनियर लीडरशिप को निशाना बनाया. ट्रंप प्रशासन ने शुरू में ईरानियों से “सरकार अपने हाथ में ले लो” का आह्वान किया था, लेकिन अब टॉप एड्स साफ कह चुके हैं कि रेजीम चेंज उनका लक्ष्य नहीं है.

कुर्द समूहों की ताकत पर शक

अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अब ईरानी कुर्द मिलिशिया की क्षमता पर भी सवाल उठा रही हैं. पिछले हफ्ते रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी थी कि इराक में बसे ईरानी कुर्द गुटों ने अमेरिका से संपर्क किया था कि वे ईरान के पश्चिमी हिस्से में सुरक्षा बलों पर हमला करें या नहीं. कोमाला पार्टी के प्रमुख अब्दुल्लाह मोहतादी ने बुधवार को कहा कि उनके गुट अंदरूनी ईरान में बेहद संगठित हैं और “हजारों युवा हथियार उठाने को तैयार” हैं – लेकिन उन्हें अमेरिकी हथियार और सपोर्ट चाहिए. हालांकि, हालिया अमेरिकी रिपोर्ट्स में साफ है कि ये कुर्द समूहों के पास न तो पर्याप्त फायरपावर है और न ही पर्याप्त संख्या.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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