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ट्रंप की धमकी पर आया ईरान का पहला रिएक्शन, याद दिलाया वो फेल मिशन जिसमें हुई थी 8 सैनिकों की मौत

ईरान में पिछले कुछ दिनों से देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं और सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. इसी मामले को लेकर बीते कुछ दिनों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई सरकार को धमकी दी थी, जिसके बाद अब खामेनेई सरकार ने ट्रंप को करारा जवाब दिया है.

ईरान में पिछले कुछ दिनों से देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं और सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. इसी मामले को लेकर बीते कुछ दिनों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई सरकार को धमकी दी थी, जिसके बाद अब खामेनेई सरकार ने ट्रंप को करारा जवाब दिया है. खामेनेई के एक करीबी सलाहकार ने कहा है कि अमेरिका को अपने सैनिकों की चिंता करनी चाहिए.

ट्रंप की खुलेआम चेतावनी पर ईरान के सुरक्षा प्रमुख का रिएक्शन आया है. उन्होंने अमेरिका को हद में रहने की हिदायत देते हुए पुराने ‘फेलियर रेस्क्यू मिशन’ के बारे में ट्रंप को याद दिलाया है, जिसमें अमेरिका की खूब बेइज्जती हुई थी.

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अपने सैनिकों की करनी चाहिए चिंता- ईरान

ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी ने चेतावनी देते हुए लिखा ‘इजरायली अधिकारियों और ट्रंप के बयानों से अब पर्दे के पीछे की सारी बातें साफ हो गई है. हम विरोध कर रहे दुकानदारों के रुख और उपद्रवी तत्वों की हरकतों में फर्क समझते हैं, और ट्रंप को यह समझना चाहिए कि इस आंतरिक मामले में अमेरिका का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा और अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचाएगा. अमेरिकी जनता को यह जानना चाहिए कि इस दुस्साहस की शुरुआत ट्रंप ने ही की है. उन्हें अपने सैनिकों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए’.

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'ईरानी अमेरिका के रेस्क्यू रिकॉर्ड को जानते हैं'

ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली शमखानी ने भी ट्वीट किया है. उन्होंने ट्रंप की चेतावनी का जवाब दिया है जिसमें उन्हें कहा है कि ‘ईरानी अमेरिका के ‘रेस्क्यू रिकॉर्ड’ को अच्छी तरह जानते हैं, इराक और अफगानिस्तान से लेकर गाजा तक ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा एक ‘रेड लाइन’ है और इसमें किसी भी दखल देने वाले हाथ को काटकर जवाब दिया जाएगा’. ये खुलेआम ट्रंप को एक चेतावनी है. इसके अलावा सिर्फ वॉर्निंग ही नहीं ‘रेस्क्यू रिकॉर्ड’ वाली टिप्पणी भी ट्रंप को याद दिलाई गई है, जो कि अमेरिका के शर्मनाक और फेल हुए रेस्क्यू मिशन को याद दिलाने वाला एक कमेंट है.

अमेरिका का वो फेल मिशन…

मिली जानकारी के अनुसार, 4 नंवबर, 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति जोरों पर थी. उस दौरान अयातुल्ला खुमैनी की अगुवाई में क्रांतिकारियों ने अमेरिकी दूतावास पर धावा बोल दिया था और 52 अमेरिकी राजनयिकों और नागरिकों को बंधक बना लिया था. इस घटना के चलते पूरी दुनिया हैरान थी.

उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर के पास इस संकट को सुलझाने के लिए केवल दो रास्ते थे: कूटनीति या बल. जब कूटनीति फेल होती दिखी, तो कार्टर ने 16 अप्रैल, 1980 को एक खुफिया बचाव मिशन को मंजूरी दी और इसे नाम दिया ‘ऑपरेशन ईगल क्लॉ’.

इसके बाद साल 1980 के अप्रैल महीने में अमेरिका ने ईरान के धूल भरे रेगिस्तान में एक रेस्क्यू मिशन चलाया था. इस ऑपरेशन को अमेरिका ने 'ऑपरेशन ईगल क्लॉ' नाम दिया था. अमेरिका का ये मिशन बुरी तरह फेल हुआ था और इसमें अमेरिका के 8 सैनिकों की मौत हो गई थी.


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