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भारतीय मूल की अनुष्का ने लंदन में रचा इतिहास, बनीं कैम्ब्रिज छात्र यूनियन की अध्यक्ष

Anoushka Kale: भारतीय मूल की अनुष्का काले ने लंदन में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। उनको कैम्ब्रिज यूनियन सोसाइटी के अध्यक्ष के तौर पर चुना गया है। जानिेए अनुष्का काले के बारे में सबकुछ।

Anoushka Kale: 20 साल की ब्रिटिश भारतीय छात्रा को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की कैम्ब्रिज यूनियन सोसाइटी का अध्यक्ष बनाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुष्का काले इस चुनाव में निर्विरोध जीती हैं। कथित तौर पर पिछले ईस्टर टर्म के बाद वह पहली महिला यूनियन अध्यक्ष बनी हैं। वह पांच चुनावों में निर्विरोध अध्यक्ष बनने वाली चौथी उम्मीदवार हैं। फिलहाल काले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सिडनी ससेक्स कॉलेज में इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई कर रही हैं।

कौन हैं अनुष्का काले?

भारत के लिए एक बड़ा छण है, क्योंकि भारतीय मूल की अनुष्का काले ने महज 20 साल की उम्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनको निर्विरोध ईस्टर 2025 के लिए कैम्ब्रिज यूनियन सोसाइटी के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। अपनी इस कामयाबी काले ने कहा कि मैं बेहद खुश हूं और सम्मानित महसूस कर रही हू। उन्होंने अपने समर्थन के लिए आभार भी जताया। ये भी पढ़ें: पाकिस्तान पुलिस में शामिल होने वाला पहला हिंदू कौन? जानें राजेंद्र मेघवार की कहानी अनुष्का काले का उद्देश्य कॉलेज की सांस्कृतिक सोसाइटी जैसे इंडिया सोसाइटी को मजबूत बनाना है। अनुष्का का इस चुनाव में मुद्दा विविधता और पहुंच (Diversity And Access) था। उन्होंने सोसाइटी में सुधार लाने के नारे के साथ जीत हासिल की है। अनुष्का का कहना है कि मैंने चुनाव से पहले जो भी वादे किए थे उनको पूरा करूंगी। इसके अलावा उन्होंने अपना मकसद बताते हुए कहा कि मेंबर्स के लिए और सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा।

कैम्ब्रिज यूनियन सोसाइटी

कैम्ब्रिज यूनियन सोसाइटी दुनिया की सबसे पुरानी डिबेंटिंग सोसाइटी में से एक है, जो साल 1815 में बनी थी। ये सोसाइटी फ्री स्पीच के लिए मशहूर है। इसके अलावा कैम्ब्रिज यूनियन सोसाइटी के पूर्व अध्यक्षों और अधिकारियों में मशहूर इंग्लिश अर्थशास्त्री और दार्शनिक जॉन मेनार्ड कीन्स, नॉ़वेलिस्ट रॉबर्ट हैरिस और हाल के सालों में ब्रिटिश भारतीय सहकर्मी और कोबरा बीयर के फाउंडर करण बिलिमोरिया का नाम भी शामिल हैं। महज 20 साल की अनुष्का काले को इतना बड़ा मुकाम मिलना गर्व की बात है। ये भी पढ़ें: सीरिया छोड़ भागे राष्ट्रपति बशर अल-असद को रूस ने दी राजनीतिक शरण, US ने दी ये प्रतिक्रिया


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