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UN में ईरान का साथ देकर भारत ने दुनिया को चौंकाया, ‘NO’ वोट से पश्चिमी देशों को दिखाया आईना

India Support Iran in UN: भारत ने ईरान के पक्ष में मजबूत रुख अपनाते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव के विरोध में NO वोट देकर दुनिया को चौंका दिया है. पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद ईरान का साथ देना भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का स्पष्ट उदाहरण है.

India Support Iran in UN: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के विशेष सत्र में 22 जनवरी को पश्चिमी देशों की ओर से लाए गए प्रस्ताव में ईरान में 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं पर गहरी चिंता जताई गई थी. इन प्रदर्शनों को मुख्य रूप से आर्थिक संकट, महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन से जुड़ी जनता की नाराजगी से शुरू हुआ बताया गया, जो पूरे ईरान में फैल गया. प्रस्ताव में ईरान सरकार द्वारा प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई को मानवाधिकार उल्लंघन' करार देते हुए तत्काल जांच की मांग की गई थी. प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग, गिरफ्तारियां, और अन्य गंभीर आरोप शामिल थे. भारत ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट देकर ईरान का साथ दिया.

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प्रस्ताव पर मतदान के क्या रहे नतीजे

फ्रांस, मेक्सिको, दक्षिण कोरिया सहित कई पश्चिमी और अन्य देशों ने ईरान के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. वहीं, भारत और चीन समेत 7 वोट इस प्रस्ताव के विरोध में पड़े. 14 देशों में अपना स्टैंड कॉमन रखा. ईरान ने इस प्रस्ताव को राजनीतिक और बाहरी हस्तक्षेप करार देते हुए खारिज किया तथा कहा कि उसके पास अपनी जांच के स्वतंत्र तंत्र हैं. भारत ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट देकर ईरान का खुलकर साथ दिया. इससे पहले भारत ने भारत ने 2022 में महसा अमिनी प्रदर्शनों पर आए समान प्रस्ताव पर भी ईरान का समर्थन किया था

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पश्चिमी दबाव के आगे नहीं झुकता भारत

भारत की यह नीति उसके रणनीतिक हितों से जुड़ी है, जिसमें ईरान से ऊर्जा आयात, चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना शामिल है. भारत हमेशा जोर देता है कि मानवाधिकार के मुद्दों पर राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचा जाना चाहिए. इस वोट से भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को दोहराया, जिसमें वह पश्चिमी दबाव के आगे नहीं झुकता और दोस्त देशों के साथ खड़ा रहता है. ईरान के साथ भारत के संबंध मजबूत हैं, और यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास को और मजबूत करता है.

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