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मस्जिदें, स्कूल, बैंक, टूरिस्ट प्लेस… 19 दिन चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों में ईरान को कितना-क्या हुआ नुकसान?

Iran Protests And Violence: ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार बड़े स्तर पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए, जिनका ईरान को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा है. करीब 19 दिन चले विरोध प्रदर्शनों के दौरान ईरान को जानी नुकसान के साथ-साथ अरबों की संपत्ति का नुकसान भी उठाना पड़ा है.

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ईरान में 1979 के बाद पहली बार ऐसे हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे.

Iran Protests And Violence: ईरान में 28 दिसंबर से हालात तनावपूर्ण थे, क्योंकि लोगों ने अली खामेनेई की सत्ता के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ था. लोग सड़कों पर थे और हिंसक विरोध प्रदर्शन करते हुए खामेनेई को सत्ता से हटाने की मांग कर रहे थे. लोगों ईरान से निर्वासित रेजा पहलवी की सरकार चाहते थे, इसलिए लोगों ने विरोध प्रदर्शन और हिंसा की. ईरान को 19 दिन चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों में अरबों की संपत्ति का नुकसान झेलना पड़ा है.

2500 से ज्यादा लोगों ने गंवाई जान

अमेरिकी मानवाधिकार संगठन HRANA के मुताबिक, ईरान में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान 2677 लोगों की मौत हुई. एंबुलेस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों और सामान को मिलाकर इमरजेंसी सर्विस को 5.3 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. 4700 बैंक, 265 स्कूल और शिक्षण संस्थान, 3 लाइब्रेरी, 8 सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों, और 4 सिनेमाघरों को डैमेज किया गया. जान गंवाने वालों में आम नागरिक और 163 सरकारी कर्मचारी शामिल हैं.

दुकानों-मस्जिदों में हुई तोड़-फोड़

प्रदर्शनकारियों ने करीब 30 राज्यों में प्रदर्शन के दौरान हिंसा और आगजनी की. 250 मस्जिदों और 20 धार्मिक केंद्रों में तोड़-फोड़ की. तेहरान में गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया. 700 से ज्यादा दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया. बैंकों की 300 से ज्यादा ब्रांच पूरी तरह डैमेज हो चुकी हैं. ATM मशीनें तक तोड़ दी गईं. बिजली के खंभों और तारों को तोड़कर करीब 6.6 मिलियन डॉलर का नुकसान किया गया. शिक्षा और संस्कृति से जुड़ी धरोहरों पर बुरा असर पड़ा.

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अब ईरान में शांति और सुरक्षा है

बता दें कि ईरान में अब हालात सामान्य हैं और लोग अपने घरों के अंदर चले गए हैं. सड़कों पर ईरान रिवॉल्यूशनरी गार्ड पूरे ताम-झाम के साथ तैनात हैं. एक और ईरान की सरकार ने सख्ती बरती. प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की और इंटरनेट ठप किया. दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हवाई हमला करने की चेतावनी दी, जिसके चलते लोग शांत हुए और विरोध प्रदर्शन रुके. अब देश में काफी हद तक शांति का माहौल बना हुआ है.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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