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अफगानिस्तान में 2 करोड़ लोग भूखमरी-सूखे का शिकार, अब बर्फबारी और फ्लैश फ्लड बनी काल! 17 की मौत

Natural Disaster in Afghanistan: अफगानिस्तान में 2 करोड़ लोगों के जीवन पर संकट गहराया हुआ है. क्योंकि अफगानिस्तान जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहा है. पहले 5 साल देश के 25 राज्यों में सूखा रहा और अब अचानक हुई बारिश से आई फ्लैश फ्लड लोगों के लिए मुसीबत बन गई है.

अफगानिस्तान को यूनाइटेड नेशन्स ने मदद ऑफर की है.

People Life in Crisis in Afghanistan: गाजा की तरह अफगानिस्तान में भी मानवीय जीवन पर संकट गहराया है. गाजा में लोग इजरायल और हमास की जंग के कारण भूखमरी और गरीबी का शिकार थे, लेकिन अफगानिस्तान में जलवायु परिवर्तन का दंश लोग झेल रहे हैं. जी हां, अफगानिस्तान में लोग पिछले 5 साल से मौसम की मार झेल रहे हैं. करीब 25 राज्य सूखे की चपेट में हैं और 2 करोड़ लोग भूखमरी झेल रहे हैं. वहीं अब बर्फबारी और फ्लैश फ्लड लोगों को मौत के मुंह में धकेल रही है.

5 साल के सूखे के बाद बारिश-बर्फबारी

दिसंबर 2025 के आखिर में अफगानिस्तान के मध्य, उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में सीजन की पहली बारिश और बर्फबारी हुई. करीब 5 साल से सूखे की मार झेल रहे इलाकों में भारी बारिश के कारण अचानक फ्लैश फ्लड आ गई, जिसने हेरात स्टेट में भारी तबाही मचाई. करीब 17 लोगों की मौत हुई है और 1800 परिवार बेघर हो गए हैं. फ्लैश फ्लड से जहां खेती-बाड़ी को नुकसान पहुंचा, वहीं लोगों के पालतू पशु-पक्षी भी मारे गए. अकेले कबकान जिले में एक परिवार घर समेत मलबे में दब गया.

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जलवायु परिवर्तन के कारण बदले हालात

नेशनल डिसास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (ANDMA) के अनुसार, अफगानिस्तान में 5 साल के सूखे के बाद अचानक बारिश-बर्फबारी जलवायु परिवर्तन का कारण है. देश का कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और जंगलों की कटाई ने जलवायु परिवर्तन को और गंभीर बना दिया है. अफगानिस्तान के हालातों को देखते हुए यूनाइटेड नेशन्स ने साल 2026 में 1.7 अरब डॉलर की आर्थिक मदद देने की अपील अफगानिस्तान से की है, क्योंकि देश के करीब 21 मिलियन यानी 2 करोड़ लोग मदद के मोहताज हैं.

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ग्लोबल ग्रीन हाउस उत्सर्जन में योगदान नहीं

अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मदद के साथ वाटर मैनेजमेंट और रिन्यूएबल एनर्जी की भी जरूरत है, लेकिन अफगानिस्तान के राजनीतिक हालात इंटरनेशनल फंडिंग के लिए बाधा हैं. ग्लोबल ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में अफगानिस्तान का योगदान न के बराबर है, इसलिए अफगानिस्तान जलवायु परिवर्तन से बहुत ज्यादा प्रभावित है. अफगानिस्तान पहाड़ों और पत्थरों का देश है, इसलिए वहां हरियाणा कम है. 1950 से अब तक देश के तापमान में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है.

एक तिहाई आबादी है भूखमरी का शिकार

बता दें कि अफगानिस्तान में साल 2025 में 19 राज्यों में सूखा था. देश की करीब 80 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर करती है, लेकिन पिछले 5 साल से सूखे के कारण साल 2026 में एक तिहाई से ज्यादा आबादी भूखमरी का शिकार है. जलवायु परिवर्तन के कारण साल 2024 में सूखे के बीच अचानक हुई बारिश से 5 लाख लोग प्रभावित हुए, वहीं साल 2025 में 90 लाख लोग बेघर हुए. सूखे के कारण लोग भूखमरी झेलते हुए संक्रामक रोगों, कुपोषण और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं.


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