England Health Scam: यूके में स्वास्थ्य घोटाला सामने आने के बाद लगातार माहौल गर्माता जा रहा है। बताया जाता है कि दूषित खून चढ़ाने के कारण 1970-80 के दशक में लगभग 3 हजार लोगों की जान गई थी। हजारों लोग एचआईवी और दूसरी बड़ी बीमारियों के कारण संक्रमित हो गए थे। इसे यूके का सबसे बड़ा स्वास्थ्य घोटाला माना जाता है, जिसने नेशनल हेल्थ सर्विस को हिलाकर रख दिया था। मामले की सात चरणों में जांच कर चुकी टीम के हेड रहे सर ब्रायन लैंगस्टाफ काफी चौंकाने वाली बातें बताते हैं। बताया कि इस दौरान एचआईवी, हेपेटाइटिस जैसी सबसे अधिक बीमारियों के शिकार लोग हुए थे।
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मामले की जांच 6 साल पहले शुरू हुई थी। एनएचएस ने 1970 के दशक की शुरुआत में हीमोफीलिया को लेकर अभियान शुरू किया था। पीड़ितों के लिए रक्त प्लाज्मा से प्राप्त एक नए इलाज फैक्टर-8 की प्रक्रिया शुरू हुई थी। खून की डिमांड बढ़ने के बाद इसे अमेरिका से आयात किया गया था। लेकिन ये खून उन कैदियों का था, जो नशे के आदी थे और अपनी सजा काट रहे थे। जिसके कारण आम लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया था। फैक्टर 8 के लिए हजारों डोनरों का प्लाज्मा मिलाया गया। यानी एक व्यक्ति का खून अगर खराब था, तो इससे पूरा बैच संक्रमित हो गया था। जिसके कारण हजारों लोग इन्फेक्टेड हुए। 3 हजार लोगों की जान चली गई थी। जिसके बाद से लोगों के निशाने पर तत्कालीन राजनेता, दवा कंपनियां और सिविल सेवक रहे।
पीड़ितों को अब मुआवजा मिलने की उम्मीद
अब रिपोर्ट सामने आने के बाद कुछ परिवारों को उम्मीद है कि उनको मुआवजा मिल जाएगा। ब्रिटिश सरकार पर भी इसको लेकर दबाव है। जांच में सामने आया है कि मामले के इतने साल बाद भी कुछ लोगों ने देश को गुमराह किया। जनता को अब तक के सबसे बड़े घोटाले के बारे में नहीं बताया गया। एक दशक में 30 हजार लोगों में संक्रमण फैला था। बताया जा रहा है कि इस मामले में अब पीएम ऋषि सुनक लोगों से माफी मांगेंगे। सर ब्रायन लैंगस्टाफ की रिपोर्ट के बाद देशभर में हल्ला मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि जो लोग जीवित बचे, उनमें भी लंबे समय तक स्वास्थ्य विकार देखने को मिले। अमेरिका को खून के लिए नकद भुगतान किया गया।