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भूकंप ने मचाई भीषण तबाही; 6.8 की तीव्रता वाले 2 झटकों से Cuba में दहशत, इमारतों-घरों को नुकसान

Earthquake Jolts Terror: समुद्री तूफान और ब्लैकआउट के बाद लगातार 2 बार भूकंप के झटके लगे, जो इतने तेज थे कि लोगों का दिल दहल गया। पहले से लोग अंधेरे में जी रहे हैं और इस बीच उन पर एक और आफत टूट पड़ी। आइए जानते हैं कि इतना खतरनाक भूकंप कहां आया और क्या नुकसान हुआ?

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Representative Image (Pixabay)

Earthquake Tremors in Cuba: पहले कैरिबियाई सागर में उठे समुद्री तूफान राफेल ने तबाही मचाई। देश के कई राज्यों में ब्लैकआउट के हालात हैं। वहीं अब भूकंप के जोरदार झटकों ने लोगों ने दहशत फैला दी है। जी हां, रविवार देररात क्यूबा आइलैंड में लगातार 2 बार भूकंप आया। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 6.8 मापी गई। हालांकि भूकंप से किसी तरह के जानी नुकसान की खबर नहीं है।

सुनामी की वॉर्निंग भी  नहीं है, लेकिन इमारतों-घरों को काफी नुकसान पहुंचा है। कई इमारतें हिल गई हैं और अब उनके गिरने का खतरा मंडरा रहा है। लोगों के घरों का सामान, दरवाजे, खिड़कियों तक हिल गईं। ज्यादातर शहरों में लोगों ने घरों के बाहर रातें बिताईं। पूरी रात लोग बच्चों-परिवार को लेकर सड़कों पर बैठे रहे। रेस्क्यू टीम भी अलार्म बजाती घूमती रही। लोगों का कहना है कि भूकंप से उनके घरों की दीवारें टूट गईं हैं और घरों को काफी नुकसान पहुंचा।

 

एक घंटे के गैप पर 2 बार लगे झटके

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, सैंटियागो डे क्यूबा में भूकंप सबसे ज्यादा महसूस हुआ। क्यूबा के पूर्वी हिस्से में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। ग्वांतानामो और जमैका में भी भूकंप का असर देखा गया। भूकंप का केंद्र ईस्ट क्यूबा के दक्षिणी ग्रानमा प्रांत में बार्टोलोमे मासो से लगभग 40 किलोमीटर दूर साउथ में थाऔर गहराई 14.6 मील (23.5 किलोमीटर) थी। रविवार को यह दूसरा सबसे शक्तिशाली भूकंप रहा, जिसकी तीव्रता 6.8 थी।

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यह भूकंप पहले वाले भूकंप के एक घंटे बाद आया, जिसकी तीव्रता USGS ने 5.9 बताई थी। चक्रवाती तूफान राफेल के क्यूबा से टकराने के बाद 18 अक्टूबर को क्यूबा द्वीप पर नेशनल ब्लैकआउट हुआ। इस तूफान के बाद ऑस्कर तूफान ने भी बी तबाही मचाई। क्यूबा पहले ही महीनों से बिजली कटौती से जूझ रहा है। 1990 के दशक के बाद सबसे खराब आर्थिक संकट से भी गुजर रहा है, जिसमें बढ़ती मुद्रास्फीति और बुनियादी वस्तुओं की कमी शामिल है।

 

लोगों ने AFP को सुनाई आपबीती

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने बताया कि भूकंप के कारण कई इलाकों में भूस्खलन भी हुआ है। कई घरों और बिजली लाइनों को नुकसान पहुंचा है। रविवार को राजधानी के लगभग 85 प्रतिशत निवासियों के यहां बिजली बहाल हो गई थी, जबकि पश्चिम में 2 सबसे अधिक प्रभावित प्रांत, आर्टेमिसा और पिनार डेल रियो, अब भी अंधेरे में हैं। सैंटियागो निवासी ग्रिसेल्डा फर्नांडीज ने कहा कि हमने पहले भी भूकंप के झटके महसूस किए हैं, लेकिन इस तरह का झटका पहले नहीं लगा। इलाके के कई घर और इमारतें पुरानी हैं, जो भूकंप से होने वाले नुकसान की चपेट में आ गई हैं।

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क्यूबा का अधिकांश पूर्वी छोर अभी भी अक्टूबर में आए तूफान ऑस्कर से उबर नहीं पाया है। सैंटियागो डे क्यूबा में रहने वाले 65 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यक्ति एन्ड्रेस पेरेज़ ने पहले भूकंप के बारे में टेलीफोन पर AFP को बताया कि भूकंप आते ही लोग तुरंत सड़कों पर निकल आए, क्योंकि जमीन बहुत तेजी से हिल रही थी। 28 वर्षीय हेयर ड्रेसर कैरेन रोड्रिग्ज ने बार्टोलोमे मासो के एक छोटे से शहर कैनी डी लास मर्सिडीज से बताया कि कुछ घरों की दीवारें टूट गई हैं, कुछ की दीवारें गिर गई हैं और कुछ की छतें ढह गई हैं। लगभग 140000 की आबादी वाले शहर बयामो के लोगों ने बताया कि सड़कों पर लगे खंभे हिल रहे थे।

 

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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