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57000 आबादी, 80% बर्फ से ढका… अमेरिका को क्यों चाहिए ग्रीनलैंड? ट्रंप की इच्छा पर क्या बोला डेनमार्क

Trump Plan For Greenland: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा जताई है और उनकी इस इच्छा पर डेनमार्क की कड़ी प्रतिक्रिया भी आ चुकी है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को हासिल करने की वजह बताते हुए इसे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया है.

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अमेरिका के एक राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश की थी.

US vs Greenland: वेनेजुएला के बाद अमेरिका का टारगेट ग्रीनलैंड है. खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा जताई है. उन्होंने फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटते समय एयरफोर्स-1 में पत्रकारों से बात करते हुए ग्रीनलैंड पर अमेरिका के दावे को दोहराया और सनसनी मचा दी. उन्होंने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है. ग्रीनलैंड के आस-पास रूसी और चीनी जहाज तैनात हैं, जो अमेरिका के लिए खतरा बन सकते हैं, इसलिए अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड को हासिल करना बेहद जरूरी हो गया है.

ट्रंप के बयान पर डेनमार्क का पलटवार

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर डेनमार्क और यूरोपीय संघ ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है. दोनों ने अमेरिका पर ग्रीनलैंड को हड़पने की योजना बनाने का आरोप लगाया है. डेनिश प्रधानमंत्री Mette Frederiksen ने कहा कि वे अमेरिका से कहना चाहती हैं कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विचार पूरी तरह बेतुका और अस्वीकार्य है. उन्होंने वाशिंगटन से अपने पुराने सहयोगी को धमकाना छोड़ने की सलाह दी है. डेनमार्क पहले भी कह चुका है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है, लेकिन अमेरिका को समझ नहीं आता.

अमेरिका को क्यों चाहिए ग्रीनलैंड?

बता दें कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा है. साल 1700 से ही ग्रीनलैंड पर डेनमार्क राज कर रहा है. ग्रीनलैंड यूरोपीय देश है, लेकिन अमेरिका और रूस के बॉर्डर पर बसा होने के कारण अमेरिका के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रतीक है. एशिया से यूरोप के बीच का समुद्री रास्ता होने के कारण चीन और रूस इस देश के आस-पास समुद्री गतिविधियां बढ़ा रहे हैं, जिन्हें अमेरिका अपने लिए खतरा मानता है, इसलिए ग्रीनलैंड को सैन्य ठिकाना बनाना अमेरिका का मकसद है. जब शीतयुद्ध चल रहा था, तब भी अमेरिका ने ग्रीनलैंड में एक राडार बेस बनाया था.

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ग्रीनलैंड में मिसाइल अटैक की वार्निंग के लिए अमेरिका ने पिटुफिक स्पेस बेस भी बनाया हुआ है. ग्रीनलैंड में दुनियाभर के दुर्लभ खनिज पदार्थों और रेयर अर्थ एलिमेंट्स का खजाना है, जिसका इस्मेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरियां और हाई-टेक डिवाइस बनाने के लिए किया जा सकता है. ग्रीनलैंड में पश्चिमी तट पर रूस-चीन की तरहफ जो बंदरगाह बनी है, उस रास्ते से अमेरिका समुद्र में अपने जहाजों की तैनाती करना चाहता है, ताकि रूस और चीन पर दबाव बनाया जा सके.

ग्रीनलैंड में रूस-चीन के जहाज क्यों?

बता दें कि ग्रीनलैंड एशिया से यूरोप तक जाने का समुद्री रास्ता है. ग्रीनलैंड का कुछ हिस्सा रूस के बॉर्डर से भी सटा है, इसलिए रूस के लिए यूरोप तक जाने का अहम समुद्री रास्ता है. आर्कटिक की बर्फ पिघलने से समुद्री रास्ते खुलने लगा है, जिसका फायदा रूस उठा रहा है, क्योंकि इस रास्ते से गुजरने पर 30 से 40 प्रतिशत रास्ता घट जाता है. सुएज कैनाल से गुजरने पर ज्यादा समय लगता है. रूस ने इस रास्ते से यूरोपी में तेल, गैस और कंटेनर शिपिंग बढ़ाई है. इसी रास्ते से रूस ने चीन तक सप्लाई भी बढ़ाई है. रूस और चीन व्यापार की सुरक्षा के मद्देनजर ग्रीनलैंड में जॉइंट कोस्ट गार्ड पेट्रोल बना रहे हैं.

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रूस की कोशिश ग्रीनलैंड और आर्कटिक के दुर्लभ खनिज भंडारों का इस्तेमाल करने की है, इसलिए ग्रीनलैंड पर कंट्रोल बढ़ाने के लिए रूस ने आर्कटिक में मिलिट्री बेस बनाना शुरू कर दिया है. चीन भी ग्रीनलैंड में माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लगाने की कोशिश में हैं, लेकिन अमेरिका दोनों को अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होने देना चाहता. इसलिए आर्कटिक महासागर और इसमें बना ग्रीनलैंड अब तीनों महाशक्तियों के लिए नाक का सवाल बन गया है. अमेरिका को डर है कि अगर ग्रीनलैंड आजाद हो गया तो चीन और रूस उस पर कंट्रोल कर लेंगे, जो अमेरिकी बॉर्डर तक उनकी पहुंच होगी.

क्या हैं ग्रीनलैंड की खूबियां?

बता दें कि ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और नॉर्थ अमेरिका महाद्वीप का हिस्सा है. ग्रीनलैंड आर्कटिक और अटलांटिक महासागर के बीच बसा देश है, जिसका 80% हिस्सा बर्फ से ढका है और इसमें विशाल ग्लेशियर के साथ-साथ आइसबर्ग भी हैं. ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे कम घनत्व वाला देश भी है, क्योंकि साल 2025 तक इस देश की आबादी करीब 57000 है. ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल करीब 21.66 लाख वर्ग किलोमीटर है. ग्रीनलैंड में हरियाली नहीं है, लेकिन इसकी खूबसूरती के लिए 10वीं शताब्दी में वाइकिंग एरिक द रेड नामक टूरिस्ट ने इसे ग्रीनलैंड नाम दिया था.

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ग्रीनलैंड की राजधानी नूक है, जो देश का सबसे बड़ा शहर है. ग्रीनलैंड में ग्रीनलैंडिक और डेनिश भाषाएं बोली जाती हैं. मछली पकड़ना, टूरिज्म, माइनिंग (रेयर अर्थ मिनरल्स) यहां आजीविका के प्रमुख साधन हैं. ग्रीनलैंड की जलवायु बेहद कठोर है. यहां सर्दियों में तापमान माइनस में चला जाता है और यहां गर्मी बेहद कम पड़ती है. ऑरोरा (नॉर्दर्न लाइट्स), आइसबर्ग और ग्लेशियर देखने के लिए लोग इस देश में आते हैं. ग्रीनलैंड तक जाने का एकमात्र रास्ता समुद्र हैं, लेकिन साल 2024 में राजधानी नुक में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट खुला था, जहां से जून 2025 से यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट सप्ताह में 2 बार उड़ती है.

ग्रीनलैंड को खरीदने का ऑफर दे चुका अमेरिका?

बता दें कि साल 1946 में अमेरिका के राष्ट्रपति रहे हैरी ट्रूमैन ने ग्रीनलैंड को खरीदने का इच्छा जताई थी और डेनमार्क को 100 मिलियन डॉलर का सोना ऑफर दिया था, लेकिन डेनमार्क ने प्रस्ताव ठुकराकर अमेरिका को ऑफर दिया था कि वह ग्रीनलैंड में अपना सैन्य ठिकाना मजबूत कर सकता है, लेकिन डेनमार्क को खरीदने या इस पर कब्जा करने सपना देखना छोड़ दे.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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