अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति को गैरकानूनी घोषित कर दिया है. इस फैसले ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ट्रंप की ओर से इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए ये टैरिफ अवैध हैं. इससे अरबों डॉलर की वसूली पर सवाल खड़े हो गए हैं. कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद अब विपक्षी खेमे ने ट्रंप को घेरना शुरू कर दिया है. कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजॉम ने इस फैसले का फायदा उठाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने मांग की कि अवैध टैरिफ से वसूली गई हर एक डॉलर की राशि तुरंत अमेरिकी नागरिकों और परिवारों को ब्याज के साथ रिफंड की जाए.
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कैलिफोर्निया के गवर्नर ने क्या लिखा?
कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए सीधे राष्ट्रपति ट्रंप को चुनौती दी. न्यूजॉम ने लिखा कि चूंकि अदालत ने इन शुल्कों को असंवैधानिक और अवैध माना है, इसलिए यह पैसा अब सरकार का नहीं बल्कि उन नागरिकों और व्यापारियों का हक है जिनसे यह जबरन वसूला गया था.
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों है खास?
अमेरिकी सरकार ने पिछले साल से अब तक इन टैरिफ से 130 से 200 अरब डॉलरकी वसूली की है. ये रकम मुख्य रूप से अमेरिकी आयातकों ने चुकाई, जिसका असर उपभोक्ताओं पर महंगाई के रूप में पड़ा. अब रिफंड की प्रक्रिया जटिल हो सकती है, क्योंकि कई कंपनियां पहले से ही कोर्ट में रिफंड की मांग कर रही हैं. जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने अपनी असहमति में कहा कि अरबों डॉलर लौटाने की प्रक्रिया एक बड़ा 'मेस' साबित हो सकती है.
ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ा
ट्रंप प्रशासन अब इस फैसले से जूझ रहा है. व्हाइट हाउस की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ट्रंप आज दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं. दूसरी ओर, यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे छोटे-मध्यम व्यवसायों को राहत मिलेगी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.
भारत पर क्या असर?
भारत उन देशों में शामिल था, जिन पर ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का असर पड़ा था. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ का बोझ मुख्यतः अमेरिकी आयातकों पर पड़ा, न कि भारतीय निर्यातकों पर. इसलिए रिफंड मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं को मिल सकता है. भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तहत कुछ टैरिफ पहले ही कम किए जा चुके हैं.