US Iran Nuclear Deal Talk: ओमान की राजधानी मस्कट में कल 6 फरवरी दिन शुक्रवार से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू होगी. दोनों देशों के बीच शांति, परमाणु और राजनयिक वार्ता हो सकती है. पूर्व अमेरिकी राजनयिक नबील खूरी ने इसकी पुष्टि की है. वहीं अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो कहते हैं कि ईरान के साथ कोई समझौता होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन कोशिश कर सकते हैं. ईरान मिलना चाहता है तो अमेरिका तैयार है, हमेशा से तैयार था.
ईरानी विदेश मंत्री ने जताया ओमान का आभार
बता दें कि ईरान और अमेरिका कल ओमान में बातचीत की टेबल पर होंगे. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर डील के लिए वार्ता शुक्रवार सुबह 10 बजे ओमान की राजधानी मस्कट में होगी. इसके लिए इंतजाम करने के लिए ओमान के आभारी हैं. ईरान और अमेरिका में युद्ध न हो, इसके लिए ओमान पहले भी दोनों देशों की बातचीत करवा चुका है. अब सीधे-सीधे दोनों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्काे रुबियो के बयान ने पेंच फंसा दिया है.
अमेरिका ने ईरान से बातचीत के रखी हैं 3 शर्तें
जहां अराघची का कहना है कि अमेरिका के साथ बातचीत न्यूक्लियर मुद्दे पर होगी, वहीं रुबियो ने वार्ता के लिए सख्त शर्तें लगाई हैं. विदेश मंत्री रुबियों के अनुसार, ईरान के साथ बातचीत केवल न्यूक्लियर मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, आतंकी समूहों को समर्थन और नागरिकों के साथ सरकार के व्यवहार जैसे मुद्दों को भी बातचीत में शामिल करना होगा. वहीं अमेरिका की इन शर्तों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है, लेकिन ईरान न्यूक्लियर डील पर वार्ता के लिए लचीलापन दिखाने को तैयार है.
मार्को रुबियो को समझौता होने की उम्मीद नहीं
इधर, ईरान का रुख देखकर विदेश मंत्री रुबियो कहते हैं कि अगर ईरानी मिलना चाहते हैं तो हम तैयार हैं. उन्होंने मिलने और बातचीत करने में रुचि दिखाई है. अगर वे अपना इरादा बदल लेते हैं तो भी हमें कोई आपत्ति नहीं है. हम मिलना और बातचीत करना पसंद करेंगे, लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि इन लोगों के साथ कोई समझौता हो पाएगा, फिर भी हम कोशिश करेंगे. हमें यह पता लगाने में कोई बुराई नहीं दिखती कि क्या कुछ किया जा सकता है. ट्रंप एक ऐसे राष्ट्रपति हैं, जो हमेशा किसी भी संघर्ष या चुनौती का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं.
रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया में किसी से भी बात करने, मिलने और बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन अमेरिका इन मुलाकातों को किसी तरह की रियायत या वैधता देने का जरिया नहीं मानते. दुनियाभर में किसी से भी, चाहे वह अमेरिका का विरोधी हो, सहयोगी हो या कोई और, बैठकर बात सुनने और बात करने में विश्वास रखता है.
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