अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि रूस के व्लादिमीर पुतिन उनके 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के लिए सहमत हो गए हैं. जबकि रूस का कहना है कि वह अभी भी इस निमंत्रण का अध्ययन कर रहा है.
स्विट्जरलैंड के दावोस में मीडिया को ट्रंप ने बताया, 'उन्हें आमंत्रित किया गया था, उन्होंने स्वीकार कर लिया है. कई लोगों ने इसे स्वीकार किया है.' जब ट्रंप से गैर-लोकतांत्रिक और विवादित हस्तियों को जोड़ने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि कुछ लोग 'विवादास्पद' हो सकते हैं, लेकिन 'अगर मैं बोर्ड में केवल 'दूध पीते बच्चों' को रखूंगा, तो इससे कोई फायदा नहीं होगा.'
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रूस ने क्या कहा?
दूसरी ओर, मॉस्को में पुतिन ने एक कैबिनेट बैठक में बताया कि उन्होंने विदेश मंत्रालय को इस प्रस्ताव का अध्ययन करने का आदेश दिया है. पुतिन ने कहा, 'रूसी विदेश मंत्रालय को उन दस्तावेजों का अध्ययन करने और हमारे रणनीतिक भागीदारों के साथ परामर्श करने का जिम्मा सौंपा गया है जो हमें भेजे गए हैं. उसके बाद ही हम निमंत्रण का उत्तर दे पाएंगे.'
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क्या तैयार हैं पुतिन?
पुतिन ने यह भी कहा कि रूस स्थायी सदस्यता के लिए मांगी गई 1 अरब डॉलर की राशि का भुगतान 'पिछली अमेरिकी सरकार द्वारा फ्रीज की गई रूसी संपत्ति' से कर सकता है. उन्होंने आगे कहा कि इन संपत्तियों का उपयोग रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता होने के बाद युद्ध से क्षतिग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए भी किया जा सकता है.
क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस'?
ट्रंप ने दुनिया के दर्जनों नेताओं को इस बोर्ड में स्थायी सीट के लिए 1 अरब डॉलर के अनुरोध के साथ निमंत्रण भेजा है. हालांकि, मूल रूप से इसे गाजा के पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए बनाया गया था, लेकिन बोर्ड का चार्टर इसकी भूमिका को केवल गाजा तक सीमित नहीं रखता. ऐसा लगता कि यह संयुक्त राष्ट्र के प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरना चाहता है, जिससे फ्रांस सहित अमेरिका के कुछ सहयोगी देश नाराज हैं.