मिडिल ईस्ट संकट के बीच ब्रिटेन आने वाले दिनों में ईरान के मिसाइल अड्डों पर अमेरिकी हमलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. शुरुआती हिचकिचाहट को दरकिनार करते हुए लंदन ने वाशिंगटन को पूर्ण समर्थन का संकेत दिया है. द गार्जियन के अनुसार, ब्रिटिश सरकार का आकलन है कि ईरान के पास अभी कई दिनों तक मिसाइल भंडार शेष हैं, जिससे क्षेत्रीय खतरा बरकरार है. इस स्थिति से निपटने हेतु अमेरिका अपने बी2 स्टील्थ बमवर्षकों को ब्रिटिश एयरबेस पर तैनात करने की तैयारी में जुटा है, ताकि लॉन्च साइट्स पर हमले तीव्रता से किए जा सकें.

ईरान के बंकर तबाह करने का प्लान


द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, परमाणु हथियार ढोने में सक्षम ये बी2 स्टील्थ बमवर्षक कुछ ही दिनों में ब्रिटेन के डिएगो गार्सिया या फेअरफोर्ड एयरबेस पर पहुंच सकते हैं. इनकी प्रमुख योजना ईरान के गहन भूमिगत बंकरों को नेस्तनाबूद करना है, जहां न केवल नेतृत्व छिपा है बल्कि हथियारों का विशाल भंडार भी संरक्षित है. अमेरिकी रणनीति इन अदृश्य विमानों की मदद से दुश्मन की रक्षा प्रणाली को भेदने और आंतरिक संरचनाओं को ध्वस्त करने पर केंद्रित है.

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क्षेत्रीय युद्ध में ब्रिटेन का रणनीतिक योगदान


अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच टकराव में ब्रिटेन के आने से युद्ध की स्थिति और बिगड़ सकती है. ऐसे में कई और देशों के इस युद्ध में शामिल होने की संभावना है. ईरान ने पहले ही उन देशों पर हमले किए हैं, जहां अमेरिकी एयरबेस स्थित हैं. ऐसे में ब्रिटेन की भी डर है कि ईरान उस पर भी हमला कर सकता है, जो कि काफी हद तक संभव है. ब्रिटेन ने शुरुआत में अमेरिका को अपना एक एयरबेस इस्तेमाल करने से मना कर दिया था, जिसे लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने नाराजगी भी जाहिर की थी. लेकिन अब ब्रिटेन अमेरिका को सहयोग देने के लिए राजी हो गया है.