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बांग्लादेश की एक अदालत ने सोमवार को ढाका के पूर्व पुलिस प्रमुख और दो वरिष्ठ अधिकारियों को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में फांसी की सजा सुनाई. यह सजा जुलाई 2024 के जन-आंदोलन के दौरान छह प्रदर्शनकारियों की हत्या से जुड़े मामले में दी गई, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से बेदखल कर दिया था. अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल-1 (ICT-1) ने पूर्व ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस आयुक्त हबीबुर रहमान, पूर्व संयुक्त आयुक्त सुदिप कुमार चक्रवर्ती और पूर्व अतिरिक्त उपायुक्त (रमना जोन) शाह आलम मोहम्मद अख्तरुल इस्लाम को अनुपस्थिति में दोषी ठहराया.
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फरार हैं फांसी की सजा पाने वाले अधिकारी
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट में गया किय वर्तमान में तीनों आरोपी फरार हैं और उनकी लोकेशन का आज भी कुछ पता नहीं चल पाया है. यह फैसला फरवरी 2025 में होने वाले बांग्लादेश के आम चुनावों से ठीक पहले आया है, जो हसीना के अगस्त 2024 में हटाए जाने के बाद पहला चुनाव होगा. अदालत ने अन्य पांच पूर्व पुलिस अधिकारियों को अलग-अलग कारावास की सजा भी सुनाई.
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5 और अधिकारियों को सुनाई गई सजा
आरोपियों में पूर्व सहायक आयुक्त (रमना जोन) मोहम्मद इमरुल को छह साल, पूर्व शाहबाग थाने के इंस्पेक्टर (ऑपरेशंस) एमद अरशद हुसैन को चार साल, जबकि कांस्टेबल एमद सुजान मिया, एमद इमाज हुसैन इमॉन और एमद नसीरुल इस्लाम शामिल हैं, जिन्हें तीन-तीन साल की सजा दी गई. अरशद, सुजान, इमाज और नसीरुल इस समय हिरासत में हैं.
शेख हसीना ने भारत में ली शरण
मामला ढाका के चांखारपुल इलाके में पांच अगस्त 2024 को हुई घटना से जुड़ा है, जब शेख हसीना ने अपनी जान बचाने के लिए भारत में शरण लिया. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने उनके आधिकारिक आवास पर कब्जा कर लिया. शेख हसीना के खिलाफ हुए प्रदर्शन पर फैसला सुनाते हुए ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस एमद गोलाम मोर्तुजा मोजुमदार ने कहा कि सबूत साबित करते हैं कि पुलिस ने घातक हथियारों से गोलीबारी की, जिससे छह लोग मारे गए.