बांग्लादेश की राजनीति में आज से नए दौर की शुरुआत होने जा रही है. देश की अंतरिम सरकार के प्रमुख और मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस फैसले के साथ ही बांग्लादेश में नई चुनी हुई सरकार के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. मोहम्मद यूनुस ने नई सरकार के शपथ ग्रहण से ठीक पहले अपना इस्तीफा दिया. बांग्लादेश की जनता के नाम अपने आखिरी संबोधन में उन्होंने 'सेवन सिस्टर्स' का जिक्र किया, लेकिन भारत का नाम नहीं लिया. उन्होंने नेपाल, भूटान और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ते हुए एक साझा आर्थिक क्षेत्र की बात कही.
क्या बोले मोहम्मद युनूस?
मोहम्मद यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश का खुला समुद्र सिर्फ भौगोलिक सीमा नहीं है, ये ग्लोबल इकॉनोमी से जुड़ने का द्वार है. नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स समेत ये पूरा इलाका आर्थिक समृद्धि की अपार संभावनाएं रखता है. आर्थिक क्षेत्र, ट्रेड डील और ड्यूटी फ्री मार्केट तक पहुंच इस क्षेत्र को ग्लोबल मैन्यूफेक्चरिंग सेंटर बना सकते हैं. मोहम्मद युनूस ने अस दौरान भारत का नाम नहीं लिया, जिसे लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि उनका ये बयान बांग्लादेश को राजनीतिक और आर्थिक तौर पर अलग ढंग से पहचान करने की कोशिश है.
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पहले भी किया 'सेवन सिस्टर्स' का जिक्र
मोहम्मद यूनुस ने इससे पहले भी सेवन सिस्टर्स का जिक्र किया था. उन्होंने मार्च-अप्रैल 2025 में अपनी चार दिन की चीन यात्रा के दौरान बीजिंग से सहयोग बढ़ाने की बात की थी. इस दौरान उन्होंने भारत के सात नॉर्थ ईस्ट राज्यों का जिक्र करते हुए कहा था कि ये राज्य समुद्र से जुड़े नहीं हैं और चीन बांग्लादेश के रास्ते वहां तक अपने संपर्क और व्यापार फैला सकता है. अब एक बार फिर मोहम्मद युनूस ने सेवन सिस्टर्स का मुद्दा उठाया है. ये बयान ऐसे वक्त पर सामने आया है, जब बांग्लादेश में नई सरकार का गठन हो रहा है. जानकारों का कहना है कि मोहम्मद युनूस का अपने बयान में भारत का नाम ना लेना कोई चूक नहीं है, बल्कि जान-बूझकर दिया गया एक मैसेज है.
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