बांग्लादेश में हुए ऐतिहासिक संसदीय चुनावों के नतीजों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है. करीब 18 महीनों की अस्थिरता के बाद देश में अब लोकतंत्र की नई सुबह होती दिख रही है. शुक्रवार को आए नतीजों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शानदार जीत दर्ज की है, जिससे पिछले 17 साल से देश से बाहर रह रहे तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. तारिक रहमान कल PM पद की शपथ ले सकते हैं.
इस बार के चुनाव कई मायनों में अलग थे क्योंकि तीन दशकों में पहली बार अवामी लीग का चुनावी निशान ‘नाव’ गायब था और शेख हसीना व खालिदा जिया जैसे दिग्गज चेहरे मैदान में नहीं थे. भारी बहुमत मिलने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि देश में कानून का राज कायम होगा और गारमेंट्स सेक्टर जैसी डूबती अर्थव्यवस्था को फिर से रफ्तार मिलेगी.
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बांग्लादेश चुनाव के नतीजों की 10 बड़ी बातें:
- बीएनपी ने अकेले 209 सीटें जीतकर अपना लोहा मनवाया है. इसके बाद जमात-ए-इस्लामी को 68 और नई बनी एनसीपी को महज 6 सीटें मिली हैं. बाकी सीटें निर्दलीयों और छोटे दलों के खाते में गई हैं.
- बांग्लादेश की 350 सीटों में से 300 पर चुनाव होता है, लेकिन इस बार उम्मीदवार के निधन के कारण 299 सीटों पर ही वोट डाले गए. बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं जो पार्टियों के प्रदर्शन के आधार पर तय होंगी.
- आजादी के बाद यह पहला मौका था जब शेख हसीना और खालिदा जिया दोनों ही चुनाव से बाहर थीं. खालिदा जिया का निधन हो चुका है, जबकि शेख हसीना अगस्त 2024 से भारत में शरण लिए हुए हैं.
- अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोका गया था, जिसके बावजूद वोटिंग प्रतिशत 48 रहा. जानकारों का मानना है कि बहिष्कार के कारण कम वोटिंग हुई और हसीना की पार्टी का आधार अब भी मजबूत बना हुआ है.
- जमात-ए-इस्लामी और छात्रों की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन वे बीएनपी के सामने टिक नहीं पाए. छात्र नेताओं की आपसी गुटबाजी ने उनका खेल बिगाड़ दिया.
- इस चुनाव में एक बड़ा इतिहास रचता दिख रहा है क्योंकि बीएनपी के गायेश्वर चंद्र रॉय ढाका से जीतने वाले 1971 के बाद पहले हिंदू सांसद बन सकते हैं.
- चुनाव के साथ-साथ ‘जुलाई चार्टर’ के लिए जनमत संग्रह भी हुआ. इसमें दो सदन वाली संसद और एक व्यक्ति के सिर्फ दो बार प्रधानमंत्री बनने जैसे बड़े सुधारों का सभी ने समर्थन किया है.
- ताजा आंकड़ों के अनुसार बीएनपी और उसके सहयोगियों ने 211 सीटें जीत ली हैं, जिससे उन्हें संसद में दो-तिहाई बहुमत मिल गया है. अब वे संविधान में बड़े बदलाव करने की ताकत रखते हैं.
- जीत के बाद तारिक रहमान ने संयम बरतने की अपील की है. उन्होंने कार्यकर्ताओं को जीत की रैली या जश्न न मनाने को कहा है और देश में दुआ करने की गुजारिश की है.
- जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान ने कहा है कि उनकी पार्टी जनादेश का सम्मान करेगी. उन्होंने चुनावी नतीजों को स्वीकार करने के संकेत दिए हैं और देशहित को प्राथमिकता बताई है.
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