India Bangladesh Relations: संसदीय चुनाव जीतकर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) गठबंधन सरकार बनाएगा और खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनेंगे। खालिदा जिया और शेख हसीना के अलावा तारिक रहमान बांग्लादेश की राजनीति का नया चेहरा बनकर उभरे हैं, जिनकी सरकार के साथ पड़ोसी देश भारत के संबंध कैसे रहने वाले हैं? इस पर सभी की नजर है। वहीं एक सवाल यह है कि क्या शेख हसीना अब स्वदेश लौट पाएंगी?
पिछले डेढ़ साल में खराब हुए हैं दोनों देशों के संबंध
खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) 20 साल बाद उनके बेटे तारिक रहमान के नेतृत्व में सत्ता में आई है। साल 2001 में पार्टी ने आखिरी बार सरकार बनाई थी, जिसके साथ भारत के संबंध काफी अच्छे थे, जो पिछले एक साल में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद उन्हें पनाह देने के कारण तनावपूर्ण हो गए। खासकर मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में संबंध ज्यादा खराब हुए कि भारत को अपनी एंबेसी वहां बंद करनी पड़ी।
सीमा नियंत्रण और घुसपैठ पर सहयोग की उम्मीद
वहीं अब जब बांग्लादेश में नया युग शुरू हुआ है तो भारत का ध्यान बांग्लादेश की नई सरकार के द्वारा सीमा नियंत्रण और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर सहयोग करने और दक्षिण एशिया क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान और उनकी पार्टी को जीत की बधाई दी है। साथ ही दोनों देशों के संबंधों को ठीक करने और मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने की उत्सुकता जताते हुए तारिक रहमान को एक संदेश भी दिया।
18 महीनों के तनाव को भूल जाना चाहता है भारत
चुनाव परिणामों का ऐलान होने के बाद भारत ने चीन और पाकिस्तान से पहले बांग्लादेश को नए युग की बधाई दी। बांग्लादेश के नए नेता का स्वागत करने की पहल की, जिसका मतलब यह है कि भारत पिछले 18 महीनों से दोनों देशों के रिश्तों में मची उथल-पुथल को भूलकर पीछे छोड़ना चाहता है। स्थिर और मजबूत द्विपक्षीय संबंध स्थापित करना चाहता है, जो यह सुनिश्चित करें कि दशकों पुराना भारत-बांग्लादेश का सहयोग हर स्थिति में बना रहेगा।
पाकिस्तान-चीन-बांग्लादेश गठबंधन हुआ तो टेंशन
भारत को उम्मीद है कि नई सरकार कर रुख भारत के साथ संबंध सुधारने पर पहले होगा, जिससे दक्षिण एशिया और क्षेत्रीय भू-राजनीति में बदलाव आ सकता है। दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि पाकिस्तान-चीन-बांग्लादेश गठबंधन भी एक पाइंट है, जो भारत के साथ संबंधों को और कमजोर बना सकता है। इस स्थिति में तारिक रहमान सरकार की विदेश नीति शेख हसीना सरकार की नीति की तुलना में भारत के लिए ज्यादा अनुकूल न हो। इससे दक्षिण एशिया पर भारत की पकड़ को कमजोर पड़ सकती है।
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