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Vote For Note Case: सुप्रीम कोर्ट ने पलटा पुराना फैसला, समझिए आखिर क्या है पूरा मामला?

Vote For Note Case History: वोट फॉर नोट केस में नया फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना ही पुराना फैसला पलट दिया है, जिससे सांसदों और विधायकों को बड़ा झटका लगेगा। सबसे ज्यादा प्रभाव झारखंड मुक्ति मोर्चा की एक महिला नेता पर पड़ेगा। आइए जानते हैं कि आखिर वोट फॉर नोट क्या है?

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आचार्य बालकृष्ण की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है।

Vote For Note Case History: वोट फॉर नोट केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपना ही पुराना फैसला पलट दिया है। पुराना फैसला 1998 में दिया गया था, जिसे अब बदलते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों और सांसदों को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब वोट के बदले पैसे लिए तो सांसदों-विधायकों की खैर नहीं। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

केस में फैसला 7 सदस्यीय पीठ ने सुनाया, जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूढ़ कर रहे हैं। वहीं इस फैसले से सबसे ज्यादा झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नेता सीता सोरेन प्रभावित होगी। उन्होंने राज्यसभा चुनाव 2012 में विधायक पद पर रहते हुए सुप्रीम कोर्ट से पैसे लेकर वोट डालने के मामले में राहत देने की अपील की थी। न्यूज24 के रिपोर्टर मानव मिश्रा से समझिए आखिर क्या है पूरा मामला?

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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