अगर आप भी रोजाना छोटे-बड़े खर्चों के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए राहत भरी खबर है. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि आम नागरिकों के लिए UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे. डिजिटल पेमेंट पर शुल्क लगाए जाने की अफवाहों के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है. सरकार के अनुसार, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के खाते में पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा. इसके साथ ही ज्यादातर मर्चेंट पेमेंट भी बिल्कुल फ्री रहेंगे. सरकार का स्पष्ट संदेश है कि आम नागरिकों के लिए यह सेवा मुफ्त रहेगी और इसकी पहुंच को आगे भी बढ़ाया जाएगा.
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मर्चेंट्स के लिए क्या बदल सकता है?
सरकार ने बताया कि भविष्य में केवल बड़े और एक तय सीमा से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही नाममात्र का 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' लगाया जा सकता है.
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- यह शुल्क डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR से काफी कम होगा.
- संसद से बिल पास होने के बाद NPCI की स्टीयरिंग कमेटी ही MDR पर अंतिम फैसला लेगी.
- यह नियम सभी दुकानों या ट्रांजैक्शन पर लागू नहीं होगा, अधिकांश मर्चेंट ट्रांजैक्शन फ्री ही रहेंगे.
क्यों पड़ी नियम में बदलाव की जरूरत?
जुलाई 2026 में UPI से 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपए रही. लगातार बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने पर खर्च काफी बढ़ गया है. सरकार के मुताबिक, सिर्फ सब्सिडी पर निर्भर रहना लंबे समय के लिए सही नहीं है. इसलिए UPI को टिकाऊ और सुरक्षित बनाने के लिए PSS Act में संशोधन किया जा रहा है. सरकार ने नीति पर किसी भी विदेशी दबाव की खबरों को पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया है. बता दें कि UPI अब 11 देशों में लाइव हो चुका है और दुनिया भर में भारत का यह सिस्टम पहचान बना रहा है.
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क्या अब फ्री नहीं कर पाएंगे UPI से पेमेंट? जानिए- कितने ट्रांजेक्शन पर देना पड़ सकता है कितना चार्ज
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