Barsana Lathmar Holi 2026 Travel Guide: जब पूरे देश में होली एक-दो दिन में खत्म हो जाती है, तब ब्रज में रंगों का ये पर्व करीब 40 दिनों तक चलता है. भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की लीलाओं से जुड़ी ब्रज होली अपने आप में बेहद खास मानी जाती है. इसी होली का सबसे अनोखा और प्रसिद्ध रूप है बरसाना की लठमार होली, जिसे देखने हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक मथुरा, वृंदावन और बरसाना पहुंचते हैं. अगर आप भी इस साल इस अद्भुत होली का अनुभव करना चाहते हैं, तो सही तारीख, समय और यात्रा की जानकारी पहले से होना बेहद जरूरी है.
क्या है बरसाना की लठमार होली
बरसाना की लठमार होली ब्रज की परंपराओं से जुड़ा एक अनोखा उत्सव है. मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा रानी के गांव बरसाना आते थे और रंग-गुलाल उड़ाते थे. इसके जवाब में बरसाना की महिलाएं लाठियों से प्रतीकात्मक रूप से उन्हें रोकती थीं. इसी परंपरा को आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जाता है, जिसे लठमार होली कहा जाता है.
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कब मनाई जाएगी लठमार होली
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ब्रज परंपरा के अनुसार साल 2026 में बरसाना की लठमार होली 25 और 26 फरवरी को मनाई जाएगी. 25 फरवरी को बरसाना में लड्डू होली का आयोजन होगा, जबकि 26 फरवरी को मुख्य लठमार होली खेली जाएगी. इसके बाद नंदगांव में भी लठमार होली होती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.
वृंदावन और बरसाना कब पहुंचें
लठमार होली का पूरा अनुभव लेने के लिए रंगवाली होली से कम से कम 4 से 5 दिन पहले वृंदावन या मथुरा पहुंचना बेहतर माना जाता है. इससे आप बरसाना, नंदगांव, वृंदावन और मथुरा में होने वाले अलग-अलग कार्यक्रमों में आराम से शामिल हो सकते हैं. त्योहार नजदीक आते ही भीड़ काफी बढ़ जाती है, इसलिए पहले से पहुंचना ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक रहता है.
बरसाना कैसे पहुंचें
वृंदावन या मथुरा से बरसाना की दूरी करीब 45 से 50 किलोमीटर है. सड़क मार्ग से यहां डेढ़ से दो घंटे में पहुंचा जा सकता है. होली के दिन ट्रैफिक और भीड़ को देखते हुए सुबह बहुत जल्दी निकलना सही रहता है. वहीं दिल्ली से बरसाना की दूरी लगभग 150 किलोमीटर है, ऐसे में आप दिल्ली से कार या बस के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं.
यात्रा के दौरान किन बातों का रखें ध्यान
लठमार होली के दिन बरसाना में भारी भीड़ रहती है, इसलिए सुबह 5 से 6 बजे के बीच पहुंचना सबसे अच्छा माना जाता है. हल्के और पूरे बाजू के कपड़े पहनें और मोबाइल व जरूरी सामान सुरक्षित रखें. मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन जरूर करें. महिलाओं और बुजुर्गों के लिए समूह में यात्रा करना ज्यादा सुरक्षित होता है.
ठहरने की सही व्यवस्था कैसे करें
बरसाना में ठहरने की सुविधाएं सीमित होती हैं, इसलिए ज्यादातर श्रद्धालु वृंदावन या मथुरा में होटल बुक करते हैं. सुबह-सुबह बरसाना जाकर होली देखने के बाद शाम तक वापस लौटना एक बेहतर विकल्प माना जाता है. होली के समय होटल जल्दी फुल हो जाते हैं, इसलिए पहले से बुकिंग कराना बेहद जरूरी है.
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