जब कभी दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं की बात होती है, तो लिस्ट में अमेरिकी सेना का नाम सबसे टॉप पर आता है. शनिवार को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर घातक एयरस्ट्राइक करते हुए कथित तौर पर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अपनी गिरफ्त में ले लिया. इस बात का दावा खुद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में किया. अमेरिका सेना, न सिर्फ ताकत के मामले में बल्कि खाने-पीने के मामले में भी अन्य देशों की सेनाओं से कहीं आगे हैं. बहुत कम लोग जानते हैं कि आज दुनिया में कई ऐसी चीजें खाने के लिए मौजूद हैं, जिनकी खोज अमेरिकी सैनिकों ने की थी.
अमेरिकी सेना की देन है खाने की ये 7 चीजें
सलाद किट (Salad kits)
खाने के साथ सलाद का चलन भारत में आज से नहीं, बल्कि सदियों से चला आ रहा है. हालांकि पैकेटबंद सलाद की शुरुआत 1950 के दशक में उस दौरान हुई जब अमेरिकी नौसेना फलों और सब्जियों की ताजगी बनाए रखने के तरीकों पर प्रयोग कर रही थी. यूएस नेवी उन कंपनियों में शामिल है, जिन्होंने पैकेटबंद खाना खराब होने से बचाने के लिए ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड वाले पॉलीथीन बैग का उपयोग किया.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें: क्या है US की डेल्टा फोर्स, जिसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को घर से ही उठा लिया; ISIS चीफ बगदादी को भी किया था ढेर
---विज्ञापन---
चीटोस (Cheetos)
भारत में पैकेटबंद चीटोस काफी पसंद किया जाता है. बच्चों लेकर बड़े तक इसे खाना पसंद करते हैं. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना का प्रोसेस्ड चीज के प्रति लगाव बढ़ा. सेना ने क्राफ्ट कंपनी से 62.5 करोड़ पाउंड सफेद चीज का ऑर्डर दिया था. युद्ध के दौरान लंबे समय तक चीज स्प्रेड को हेल्दी बनाए रखने के लिए चीज को सुखाने की तकनीकों पर प्रयोग शुरू हुआ. 1943 में यूएसडीए के वैज्ञानिक जॉर्ज सैंडर्स ने चीज को कद्दूकस करके, फिर सुखाकर, पीसकर, सुखाकर और केक के आकार में बनाकर पहला चीज पाउडर तैयार किया.
स्टेल-रेजिस्टेंट ब्रेड (Stale-Resistant Bread)
1991 के ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म में चीफ वारंट ऑफिसर पीटर मोट्रिंजुक ने कहा था कि युद्धक्षेत्र पर ब्रेड जरूरी है, लेकिन सबसे बड़ी दुविधा ये थी कि ताजी रोटी को समय पर जवानों तक पहुंचाना मुश्किल था. द्वितीय विश्व युद्ध में मिलिट्री ने एक्टिव ड्राई यीस्ट का आविष्कार किया, जिसे उन दिनों फॉयल पैकेट्स में जवानों तक पहुंचाया जाता था. 1950 में कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने फैटी एसिड्स और बैक्टीरियल एंजाइम्स से शेल्फ-स्टेबल, नरम ब्रेड बनाई, जो सैनिकों तक पहुंची और आज सुपरमार्केट शेल्फ्स पर उपलब्ध है.
यह भी पढ़ें: वेनेजुएला पर ट्रंप के हमले से पहले मादुरो से चीन के खास दूत ने की थी मुलाकात, किन मुद्दों पर हुई थी चर्चा?
मैकर्ब (The McRib)
दुनियाभर के सेनाओं के लिए अपने प्रोटीन को पूरा करने का सबसे जरूरी उत्पाद नॉनवेज फूड होता है. हालांकि मिलिट्री के लिए मांस सबसे महंगा आइटम रहा है. इसे भी खाने लायक बनाए रखने के लिए फ्रीज करना जरूरी था, इस समस्या को दूर करने के लिए 1960 में नेटिक सोल्जर रिसर्च सेंटर ने स्वादिष्ट, किफायती फैब्रिकेटेड बीफस्टेक विकसित किया. मैकडॉनल्ड्स ने इसी रिस्ट्रक्चर्ड मीट प्रोसेस से 1981 में चिकन मैकनगेट्स और मैकर्ब लॉन्च किया.
फ्रोजन ऑरेंज जूस (Frozen Orange Juice)
1942 में विटामिन C की कमी की समस्या को दूर करने के लिए अमेरिकी आर्मी ने फ्रोजन ऑरेंज जूस की खोज की. कई कोशिशों के बाद 1945 में USDA वैज्ञानिकों ने सही प्रोसेस बनाया जिसका पहला कॉन्ट्रैक्ट फ्लोरिडा फूड्स कॉर्प को मिला. इस खोज के बाद कंपनी ने नाम बदलकर मिनट मेड रखा और बिंग क्रॉस्बी के ऐड से घर-घर लोकप्रिय हुआ.
एनर्जी बार्स (Energy Bars)
आज जो आप एनर्ज चॉकलेट खाते हैं, इसका इजाद भी अमेरिकी सेना द्वारा किया गया था. 1930 में हर्शी के साथ लॉगन बार तैयार किया गया, लेकिन इसका स्वाद बेहद बुरा था. समय के साथ इसमें कई बदलाव किए गए और 1943 का ट्रॉपिकल चॉकलेट बार खाने में थोड़ा ठीक था. इसके बाद NASA के साथ रिसर्च से मॉइश्चर-कंट्रोल्ड अप्रिकॉट बार बना और फिर पिल्सबरी ने 1970 में च्यूई एनर्जी बार लॉन्च किया.
M&M's
अमेरिका में काफी पसंद किया जाने वाले M&M's को मिलिट्री ने नहीं बनाया, लेकिन 1941 में फॉरेस्ट मार्स सीनियर और हर्शी के ब्रूस मूरी ने सैनिकों के लिए ही नॉन-मेल्ट चॉकलेट बनाया था. इस नई कैंडी का नाम इसके आविष्कारकों के सरनेम 'मार्स और मुर्री' पर रखा गया. 1947 में इस कैंडी को आम जनता के लिए उपलब्ध कराया गया, जिसे जबरदस्त सफलता मिली.