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कैसा होगा बंगाल का राम मंदिर? 100 करोड़ रुपये की लागत में भव्य निर्माण, 2028 तक तैयार!

ट्रस्ट के अध्यक्ष और शांतिपुर के पूर्व विधायक अरिंदम भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि 15वीं शताब्दी के कवि कृतिबास ओझा की 'श्रीराम पंचाली' परंपरा को समर्पित सांस्कृतिक केंद्र होगा.

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है. बीते रविवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य से हुगली जिले के सिंगूर से चुनावी बिगुल फूंका. इस बीच नदिया जिले के शांतिपुर में 'बंगाली राम' की थीम पर आधारित एक विशाल राम मंदिर और हेरिटेज सेंटर के निर्माण की कवायद तेज हो गई है. श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट ने रविवार को जमीन का अंतिम सर्वेक्षण पूरा कर लिया, जिसे परियोजना की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है.

100 करोड़ रुपये की लागत में बनेगा मंदिर


आपको बता दें कि बंगाल में बनने वाला राम मंदिर भी अयोध्या के रामलला मंदिर जैसा ही भव्य होगा, इसके निर्माण में 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है. इसके निर्माण के संपन्न होने का लक्ष्य 2028 तक रखा गया है, मंदिर के लिए ट्रस्ट को दान में 15 बीघा जमीन भी मिली है. ट्रस्ट के अध्यक्ष और शांतिपुर के पूर्व विधायक अरिंदम भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि 15वीं शताब्दी के कवि कृतिबास ओझा की 'श्रीराम पंचाली' परंपरा को समर्पित सांस्कृतिक केंद्र होगा.

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2017 में ही तैयार हो गया था मंदिर का प्लान


उन्होंने कहा कि कृतिबास ओझा ने संस्कृत रामायण का बंगाली अनुवाद कर राम को बंगाल की भावभूमि से जोड़ा, जिसे 'हरा राम' भी कहा जाता है. 2017 से चली आ रही इस परियोजना को चुनावी रंग देने के सवाल पर भट्टाचार्य ने खारिज करते हुए इसे शुद्ध सांस्कृतिक प्रयास बताया, हालांकि उन्होंने सरकार से सहयोग की अपील भी की.

कैसा होगा बंगाल का राम मंदिर?


मंदिर का संरक्षण नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को सौंपा गया है. परिसर में सांस्कृतिक केंद्र, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और शोध केंद्र की भी योजना है. स्थानीय निवासियों लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी ने जमीन दान की है, जबकि अन्य लोग भी आगे आ रहे हैं. शांतिपुर वासी सुमन बैनर्जी जैसे लोगों का मानना है कि भक्ति आंदोलन की इस नगरी में कृतिबास की विरासत को ऐसा मंदिर नई पहचान देगा.


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