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बंगाल चुनाव से पहले हिंसा पर अमित शाह का बड़ा हमला, TMC सरकार पर गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी हिंसा और घुसपैठ को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए
निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त चुनाव की मांग की है.

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प्रशांत देव पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी हिंसा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गई है. भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनावी हिंसा सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है. इसी मुद्दे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल दौरे के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए.

अमित शाह ने कहा कि बंगाल में चुनाव का मतलब भय और हिंसा का माहौल बन चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतंत्र को दबाने का काम किया जा रहा है और विपक्षी कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है. गृह मंत्री ने स्पष्ट कहा कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन बंगाल में यह पूरी तरह विफल नजर आ रही है.

पश्चिम बंगाल में 2018 के पंचायत चुनाव , 2019 लोकसभा चुनाव 2021 विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव में चुनावी हिंसा में कई लोगों की जान गई ,बीजेपी का आरोप है कि उसके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर मारा जा रहा है. इसके अलावा बंगाल में सांप्रदायिक दंगे और CAA के विरोध में भी हिस्सा में कई जाने गई. बंगाल बीजेपी सांसदों और कार्यकर्ताओं ने सरकार और चुनाव आयोग कें सामने एक प्रस्ताव रखा है जिसमें ये मांग की गई है कि राज्य पुलिस को चुनावी प्रक्रिया से दूर रखा जाए जानकारी के मुताबिक बंगाल बीजेपी ने चुनाव के दौरान मांग की है कि…

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मतदान केंद्र परिसर के भीतर उपस्थिति पर प्रतिबंध

निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त आधिकारिक मतदान कर्मियों को ही मतदान केंद्र परिसर के भीतर उपस्थित रहने की अनुमति दी जाए. सभी प्रत्याशी राजनीतिक दलों के एजेंटों को मतदान केंद्र परिसर के बाहर बैठने की अनुमति दी जा सकती है. बिहार सहित कई राज्यों में राजनीतिक एजेंटों को मतदान केंद्र के भीतर अनुमति नहीं दी जाती है,
जिसकी पुष्टि पूर्व लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों की वीडियो फुटेज से की जा सकती है.

किसी भी समय केवल एक मतदाता को ही मतदान कक्ष के भीतर जाकर मतदान करने की अनुमति दी जाए. इससे मत की गोपनीयता सुनिश्चित होगी तथा अनावश्यक भीड़ अथवा भय का वातावरण नहीं बनेगा.

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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की तैनाती एवं दायित्व

मतदान केंद्र के मुख्य द्वार तथा उसके बाहर की सुरक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को सौंपी जाए.
CAPF कर्मियों को मतदाताओं के EPIC कार्ड अथवा अन्य वैध पहचान पत्र की जांच करने का अधिकार प्रदान किया जाए. प्रत्येक मतदान केंद्र के द्वार पर महिला CAPF कर्मियों की अनिवार्य तैनाती की जाए, ताकि महिला मतदाताओं, विशेषकर बुर्का पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं की पहचान गरिमा एवं सुरक्षा के साथ सुनिश्चित
की जा सके.

राज्य पुलिस की तैनाती पर प्रतिबंध

मतदान केंद्र परिसर के 200 मीटर के दायरे में राज्य पुलिस की तैनाती न की जाए. इस संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को सौंपी जाए, जिससे निष्पक्षता बनी रहे और किसी भी प्रकार के अनुचित प्रभाव की आशंका

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शाह ने घुसपैठ के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि बंगाल का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा घुसपैठ है, जो न केवल राज्य बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुका है. शाह के मुताबिक अवैध घुसपैठ से जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ रहा है और इसका सीधा असर चुनावी प्रक्रिया पर पड़ता है. गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार घुसपैठियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दे रही है, जिससे कानून-व्यवस्था और अधिक कमजोर हो रही है. उन्होंने कहा कि भाजपा बंगाल में हिंसा-मुक्त, पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए हर संवैधानिक कदम उठाएगी.

बंगाल चुनाव से पहले अमित शाह के इन बयानों से सियासी माहौल और गर्मा गया है. आने वाले दिनों में चुनावी हिंसा और घुसपैठ का मुद्दा बंगाल की राजनीति में और तीखा होने की संभावना है.

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