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सात अधिकारियों के निलंबन पर चुनाव आयोग पर भड़कीं ममता, लगाए कई गंभीर आरोप

विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने सात एईआरओ (Assistant Electoral Registration Officer) को निलंबित कर दिया है. इस फैसले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी नाराजगी जताई है और चुनाव आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. पढ़ें कोलकाता से अमर देव पासवान की रिपोर्ट.

विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने सात एईआरओ (Assistant Electoral Registration Officer) को निलंबित कर दिया है. इस फैसले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी नाराजगी जताई है और चुनाव आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं.

राज्य सचिवालय नवान्न में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ममता बनर्जी ने कहा कि वह चुनाव आयोग के इस कदम पर खामोश नहीं बैठेंगी और अपने अधिकारियों के पक्ष में खड़ी रहेंगी. उन्होंने आयोग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करने का आरोप भी लगाया.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन अधिकारियों को डिमोट किया गया है, उन्हें राज्य सरकार अलग-अलग क्षेत्रों में 'प्रमोट' करेगी. उन्होंने बताया कि इन अधिकारियों को दो साल की परिवीक्षा अवधि और तीन साल तक बीडीओ के रूप में काम करने के बाद एसडीओ के पद पर पदोन्नत किया जाएगा.

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ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर हमला बोलते हुए कहा कि आयोग 'एक राजनीतिक दल द्वारा संचालित तुगलकी आयोग' बन गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग आम लोगों को आतंकवादियों की तरह देख रहा है और भाजपा के निर्देश पर एसआईआर के दौरान बंगाल के मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा, 'ईआरओ को निलंबित करने का कारण क्या है? क्या आपने उनसे पूछा कि उनका अपराध या गलती क्या है?' उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार को आयोग के निर्देश पर ही कार्रवाई करनी पड़ी.

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि निलंबित अधिकारियों को बर्खास्त नहीं किया जा रहा है. वे चुनाव संबंधी कार्यों से अलग रहकर अन्य प्रशासनिक काम करेंगे और उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी. जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा.

उन्होंने निलंबन की तुलना तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक अनुशासनात्मक मामलों से करते हुए कहा कि अगर कोई गंभीर गलती नहीं होती, तो पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है, फिर मामला अनुशासनात्मक समिति के पास जाता है और उसी की सिफारिश पर कार्रवाई होती है. फिलहाल, सातों अधिकारियों के खिलाफ जांच जारी है और उसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा.


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