पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के नंदन सिनेमा हॉल मे एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का अनावरण किया गया है, बताया जा रहा है की यह फिल्म तृणमूल महासचिव अभिषेक बैनर्जी की पारीकल्पना और मंजूरी और तृणमूल सांसद सह टॉलीवुड के जाने माने अभिनेता राज चक्रवर्ती के निर्देशित में बनी है.
अभिषेक बैनर्जी की अगर माने तो 2021 विधानसभा चुनाव से पहले बंग ध्वनि यात्रा कर लोगों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया था, जिसमें हमने 2011 में सरकार में आने के बाद राज्य के आम जनता के लिये क्या -क्या किया, उनके उज्वल भविष्य के लिये कितने लाभकारी योजनाओं का सिल न्यास किया और हम लगातार विभिन्न योजनाओं के जरिए लोगों के बिच जाकर उनकी समस्याओं को सुन उसका निवारण भी कर रहे हैं चाहे वह स्वास्थ्य से जुड़ा हो, शिक्षा से जुड़ा हो, क़ृषि से जुड़ा हो, समाजिक सुरक्षा सहित कई अन्य चीजों से जुड़ा हो सकता है.
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यही चीजें हमने अपनी एक घंटे की बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म मे दिखाएं हैं, जिसमें राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही सात से आठ ही कल्याणकारी योजनाओं के बारे में दिखाया गया है, बाकी के 90 से लेकर 92 ऐसी योजनाएं हैं, जिनको नहीं दिखाया गया, उन्होंने कहा इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म मे जिसने लखि का रोल अदा किया है, ऐसी कई लखि हमारे राज्य मे हैं, जो राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं.
उन्होंने कहा यह फिल्म काल्पनिक कहानी के साथ -साथ एक राजनीतिक प्रभावशाली पर आधारित एक पटकथा भी है, यह फिल्म तृणमूल सरकार की 15 वर्षों की कल्याणकारी और लाभकारी योजनाओं को भी केंद्र कर रही है, जो 2026 के चुनाव मे उनकी चुनावी अभियान मे शामिल होने जा रही है जो विरोधी दलों द्वारा राज्य की जनता को किए जा रहे झूठे वादे और उनको बर्गलाने और डराने के लिये उठाए जा रहे कदमो का मुहतोड़ जवाब है.
उन्होंने कहा की चुनाव से पहले इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म को हर गांव और मोहल्ले मे लोगों को दिखाई जाएगी, जिसे देख राज्य की जनता को मालूम हो की उनके भले और हित के लिये सोंचने वाली अगर कोई पार्टी है तो वह है तृणमूल दूसरी कोई पार्टी नही, बताया जा रहा है की इस फिल्म मे एक ग्राम की लड़की को दिखाया गया है, जिसने कम उम्र मे ही अपने पति को खो दिया, विधवा का किरदार निभाने वाली लड़की का रोल सुभाश्री गांगुली ने निभाया है, जिसके किसान पति की दिल के दौरे से मौत हो जाती है, जिसके बाद गरीब विधवा को समाज ही नही बल्कि अपने परिवार के लोगों की भी पड़ताड़ना झेलनी पड़ती है, लड़की के जीवन की कहानी मे तब नया मोड़ आता है, जब धीरे -धीरे उसको सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगता है.
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घरेलु सहायता के लिये लखि भंडार, खेती सहायता के लिये कृषक बंधु, आजीविका के लिये स्वंय सहायता समूहों के ऋण, देवरानी के बाल विवाह रोकने के लिये कन्या श्री, स्वास्थ्य सेवा के लिये स्वास्थ्य साथी, और स्थाई आवास के लिये बांगला बाड़ी, यह तमाम सरकारी योजनाएं उस विधवा लड़की को अपनी जिंदगी फिर से संवारने मे काफी मदद कर्ता है.
इस फिल्म को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “किसी भी निर्वाचित सरकार का कर्तव्य और जिम्मेदारी अपने पूरे कार्यकाल के दौरान काम करना होता है. यह डॉक्यूमेंट्री सात या आठ योजनाओं को उजागर करती है लेकिन और भी कई योजनाएं हैं.” केंद्र पर वित्तीय वंचना का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने कहा कि धन रोके जाने के बावजूद कई योजनाएं लागू की गईं. उन्होंने कहा, “केंद्र पर बंगाल के लगभग दो लाख करोड़ रुपये बकाया हैं. केंद्र सरकार दिल्ली बंगाल को वंचित रखना चाहती थी, लेकिन हम उनकी कृपा पर नहीं टिके. हमारी सरकार ने दिखाया है कि आत्मनिर्भर बंगाल का क्या मतलब है.