Babri like Masjid IN Murshidabad: तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक हुमायु कबीर मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद बनाने की जिद पर अड़ने से पहले बांग्लादेश के 11 दिवसीय दौरे पर गए थे. सूत्रों के अनुसार, हुमायु कबीर 28 सितंबर 2025 को कोलकाता एयरपोर्ट से बांग्लादेश रवाना हुए थे और ढाका एयरपोर्ट पर उतरे. इस दौरान उन्होंने ढाका, कॉक्स बाजार, ढाकेश्वरी मंदिर सहित कई स्थानों का भ्रमण किया. खबर है कि इस यात्रा के दौरान उनकी वहां की कुछ नामचीन हस्तियों से मुलाकात और बातचीत भी हुई. सूत्रों के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2025 को वे चार पहिया वाहन से मालदा के मेहदीपुर बॉर्डर के रास्ते भारत लौटे. इसके बाद वे अपने राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में जुट गए. ठीक एक महीना 11 दिन बाद, 20 नवंबर को उन्होंने मीडिया के सामने आकर मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद के निर्माण की घोषणा की और 6 दिसंबर को उसकी नींव रखने का ऐलान किया. अब राजनीतिक हलकों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि बाबरी मस्जिद निर्माण के पीछे कहीं बांग्लादेश का समर्थन तो नहीं है.
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अनुमानित लागत करीब 300 करोड़ रुपये
बताया जा रहा है कि इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 300 करोड़ रुपये है. खुद हुमायु कबीर कई मंचों से यह कह चुके हैं कि उन्हें मस्जिद निर्माण के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी चंदा मिल रहा है. उन्होंने कुछ चंदों से जुड़े वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किए हैं. हालांकि, हुमायु कबीर ने मीडिया के सामने अपने बांग्लादेश दौरे की बात स्वीकार की है, लेकिन बाबरी मस्जिद निर्माण को मिल रहे समर्थन के पीछे किन-किन लोगों या संगठनों का हाथ है, इस पर उन्होंने अब तक कोई स्पष्ट खुलासा नहीं किया है. उनका कहना है कि वे कैमैक स्ट्रीट के निर्देश पर 28 सितंबर से 10 अक्टूबर तक बांग्लादेश में थे, लेकिन इस दौरे और मस्जिद निर्माण के बीच किसी भी तरह के सीधे संबंध को लेकर वे चुप्पी साधे हुए हैं.
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4 दिसंबर को हुमायु कबीर तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित
मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद बनाने की मंशा सार्वजनिक कर हुमायु कबीर न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए. उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों को तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोलने का मौका मिल गया और कई राजनीतिक दलों व संगठनों ने उनके फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया. पार्टी की बढ़ती किरकिरी को देखते हुए मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने हुमायु कबीर से दूरी बनानी शुरू कर दी. तृणमूल के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझाने की कोशिश की और निर्णय वापस लेने के लिए बातचीत भी हुई, लेकिन हुमायु कबीर अपनी जिद पर अड़े रहे. अंततः 4 दिसंबर को तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया.
पार्टी से निष्कासन के बाद भी तेवर नरम नहीं पड़े
पार्टी से निष्कासन के बाद भी हुमायु कबीर के तेवर नरम नहीं पड़े. 22 दिसंबर को उन्होंने एक नई राजनीतिक पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ के गठन की घोषणा कर दी. उन्होंने दावा किया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में बंगाल की 294 में से 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे. साथ ही यह भी कहा कि यदि कोई अन्य दल उनके साथ गठबंधन करता है तो शेष सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी, अन्यथा उनकी पार्टी सभी 294 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी. हुमायु कबीर का यह भी कहना है कि उनकी नई पार्टी को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है और बाबरी जैसी मस्जिद के निर्माण के लिए चंदा भी प्राप्त हो रहा है. इसी बीच सोशल मीडिया पर उनके कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है.
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