बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) से इस्तीफा दे दिया है. गणतंत्र दिवस के मौके पर सामने आया यह कदम UGC रेगुलेशंस 2026 और प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार से उपजी नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल उनके इस्तीफा पत्र में राज्यपाल, मुख्य चुनाव आयुक्त तथा राज्य चुनाव आयुक्त को संबोधित करते हुए उन्होंने इन मुद्दों को सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया है.
कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?
अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं, जो मूल रूप से कानपुर के निवासी हैं. उन्होंने आईआईटी बीएचयू से बी.टेक और एलएलबी की पढ़ाई की. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रति अपना आभार जताते हुए उन्होंने इस्तीफा पत्र में महामना मदन मोहन मालवीय के स्वप्नों का जिक्र किया. वर्तमान में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट (ADM) के पद पर तैनात अग्निहोत्री इससे पूर्व उन्नाव, बलरामपुर, एटा में एसडीएम और लखनऊ में असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
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किस बात से नाराज थे अलंकार अग्निहोत्री?
इस्तीफा पत्र में अग्निहोत्री ने लिखा कि वे काशी और हनुमान जी की वीरभूमि से प्रेरित होकर यह फैसला ले रहे हैं. यूजीसी के इक्वलिटी एक्ट को उन्होंने सामान्य वर्ग, खासकर ब्राह्मण समुदाय की बेटियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया, जबकि माघ मेले में शंकराचार्य के बटुक शिष्यों के साथ स्थानीय प्रशासन द्वारा चोटी खींचने और घसीटने जैसे कृत्यों को ब्राह्मणों का अपमान करार दिया. फेसबुक पर पोस्ट की गई इस चिट्ठी ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है.
सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा
यह घटना यूपी में ब्राह्मण असंतोष को उजागर करने वाली एक बगावत के रूप में देखी जा रही है. प्रशासनिक सेवा में उनकी सख्त और कुशल छवि रही है, लेकिन इस इस्तीफे ने सत्ता पक्ष पर सवालों की बौछार कर दी. सोशल मीडिया पर कई लोग इसे साहसी कदम बता रहे हैं, वहीं आलोचक राजनीतिक बयानबाजी का आरोप लगा रहे हैं. मामला अब और गहरा सकता है, क्योंकि अग्निहोत्री ने 'काला कानून वापस लो' जैसे नारों के साथ बीजेपी का बहिष्कार करने का आह्वान भी किया है.